किसी भी व्यक्ति के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद अधिनियम के तहत कार्रवाई करने में अब किसी भी प्रकार का फ्रॉड हुआ तो वह थानेदार के गले की फांस बन जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने इसे लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है। गोरखपुर के एडीजी दावा शेरपा ने कहा है कि गैंग चार्ट में थानेदार सबसे नीचे लिखेंगे कि उन्होंने जो आपराधिक विवरण दर्ज किया है वह पूरी तरह सत्य है। गैंग चार्ट को सीओ और एएसपी देखेंगे और संस्तुति देंगे जिसके बाद ही एसएसपी उसे अनुमोदित कर डीएम को भेजेंगे।
उत्तर प्रदेश गिरोहबंद अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के एक मामले को हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने सख्ती दिखाई है। शासन की मंशा को पुलिस के उच्चाधिकारियों ने भांप ली है। गोरखपुर जोन के एडीजी दावा शेरपा ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि थानेदारों को सख्त हिदायत दी जाए कि जिन आपराधिक मामलों में आरोपित को दोषमुक्त किया जा चुका है उसे गैंग चार्ट तैयार करते समय किसी सूरत में अंकित न किया जाए। इतना ही नहीं, यदि किसी मामले में एक बार यह कार्रवाई की जा चुकी है तो दुबारा कार्रवाई करते समय उस मुकदमे को न दर्शाया जाए।
एडीजी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जिस थाने में गिरोह बंद अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए, विवेचना वहां नहीं, दूसरे थाने के थानेदार से करवाई जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि गिरोहबंद अधिनियम के तहत उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जाए जिनकी आपराधिक गतिविधियां इस अधिनियम में दिए गए प्रावधानों के अंतर्गत आती है। एडीजी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि ऐसे मामलों में एसएसपी द्वारा खुद परीक्षण कर भलीभांति सुनिश्चित हो जाएं, इसके बाद ही आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति दें।

गलत रिपोर्ट पर रद्द होगा मामला

जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। इसमें एसएसपी को उपाध्यक्ष, जिला शासकी अधिवक्ता को सदस्य एवं वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी को सचिव नियुक्त किया गया है। अब गिरोह बंद अधिनियम के मामलों की समिति हर तीन माह में समीक्षा करेगी। यदि विवेचनाधीन मामला फर्जी मिलेगा तो समिति रिपोर्ट देकर नियमानुसार अभिलेखों से उसे खारिज करा देगी। यदि मामला कोर्ट भेजा जा चुका है और किसी गलत सूचना की जानकारी हो जाती है तो उसे नियमों के तहत वापस ले लिया जाएगा।
कार्रवाई के लिए दक्ष बनाने को होगी कार्यशाला
उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलापों में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिनयम 1986 में दिए प्रावधानों का इस्तेमाल जरूरी है। इसके साथ ही समय-समय पर शासन द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं जिनका अनुपालन भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश शासन ने कहा है कि इस अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए प्रावधानों और निर्देशों की जानकारी जरूरी है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि डीएम-एसएसपी के निर्देशन में कार्यशाला आयोजित हो। इस कार्यशाला में जिला शासकीय अधिवक्ता, संयुक्त निदेशक
अभियोजन तथा थानेदारों को शामिल किया जाए।

मंडल में 161 के खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई

पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस साल गोरखपुर मंडल में 161 लोगों के खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई की गई है। इनमें गोरखपुर जिले में 61, देवरिया में 44, कुशीनगर में 33 और महराजगंज में 23 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।