कसया/कुशीनगर। मानसिक आरोग्यता केवल मानसिक रोगों की अनुपस्थिति नही बल्कि आपके विचार, भाव और व्यवहार का धनात्मक रूप से क्रियाशील होना है। उक्त बातें गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो अनुभूति दुबे ने मेन्टल वैलनेस माह के उपलक्ष्य में बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर के फेसबुक पेज “तथागत सहचर” पर “मानसिक स्वास्थ्य की प्राप्ति” विषय पर आयोजित लाइव व्याख्यान में कहीं। प्रो दुबे ने बताया कि मानसिक कल्याण के लिए
आवश्यक है कि हम अपने जीवन में वरीयताएं तय करें। वो चीज़े जो हमारे जीवन में महत्व रखती हैं, उन्हें चिन्हित करें और उन्हें सहेजने की कोशिश करें। हम गलत चीजों को वरीयता देने लगते हैं और इस चक्कर में मानसिक तनाव और उद्विग्नता का शिकार हो जाते हैं।उन्होंने कहा कि दूसरी महत्वपूर्ण चीज़ जो हमे मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है वो है आभार। हमे अपने जीवन मे जो कुछ भी प्राप्त है उसके लिए उत्तरदायी लोगों के प्रति सदैव आभार व्यक्त करना चाहिए। हम प्राप्त के प्रति आभार व्यक्त करने की बजाए जो प्राप्त नहीं है उसकी शिकायत करते रहते हैं , इसलिए मानसिक रूप से अशांत और तनावग्रस्त रहते हैं।
प्रो दुबे ने विषय पर आगे बात करते हुए कहा कि हमारा जीवन बी यानी बर्थ(जन्म) से शुरू होकर डी यानी डेथ(मृत्यु) पर समाप्त हो जाता है। इस बी और डी के बीच जो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है वो है सी यानी चॉइस(चयन)। हम अपने जीवन मे किन चीजों का चयन कर रहे हैं ये भी हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। आज के इस भौतिकतावादी समय मे हम भौतिक वस्तुओं में खुशी तलाशते है और इस चक्कर मे वो चीजें पीछे छूट जाती हैं जो हमे वास्तव में सुख देती हैं, जैसे हमारे रिश्ते, हमारा परिवार, हमारे इष्ट मित्र। इसलिए अपने जीवन मे महत्वपूर्ण चीजों का चुनाव बहुत सतर्कतापूर्वक करें। इसी प्रकार एक सुखी और संतुष्ट जीवन जीने के लिए आवश्यक है कि हम स्वयं को जाने। अपनी योग्यताओं और कमियों को समझे बिना हम कभी आंतरिक रूप से प्रसन्न और शांत नही रह सकते। इसी प्रकार अपने भावों की अभिव्यक्ति भी बहुत महत्वपूर्ण है। किसी व्यवहार के पीछे का संवेदी सुख बहुत दिन तक नही टिक पता पर यदि उसके साथ भाव को जोड़ दिया जाए तो वो सुख लंबे समय तक बना रहता है। लक्ष्य निर्धारण भी मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब हम अपने लिए कोई लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहते है तो इस पूरी प्रक्रिया से मिलने वाली खुशी न सिर्फ हमे संतुष्टि बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती है। परंतु लक्ष्य हमेशा स्मार्ट होना चाहिए। स्मार्ट से तात्पर्य है एस यानी स्पेसिफिक या विशिष्ट, एम मतलब मेसेरेबल या मापन योग्य, ए अर्थात अचीवेबल या प्राप्त करने योग्य, आर यानी रिलेवेंट, सार्थक और टी मतलब टाइम बाउंड।
प्रो दुबे ने आगे कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी ज़रूरी है। संतुलित आहार लें, किसी भी प्रकार के व्यायाम को अपने जीवन मे शामिल करेंऔर अपने संबंधों को मजबूत बनाएं। जब हमारे सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं तो वो हमें जीवन के संघर्षों का सामना करने की ताकत प्रदान करते हैं और हम कठिन से कठिन परिस्थिति में भी स्वयं को संभाल कर बाउंस बैक कर पाते हैं। अपने आर्थिक पक्ष को संतुलित रखना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। हमे अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच अंतर समझना चाहिए। इच्छाओं और ख्वाहिशों के पीछे भागने से तनाव होता है जो हम मानसिक रूप से बेचैन रहने लगते हैं।
आखिरी में प्रो अनुभूति ने कहा मानसिक रूप से संतुष्ट रहने के लिए समाज के साथ जुड़ना भी बहुत ज़रूरी हैं। जब हम किसी भी प्रकार से समाज मे कोई योगदान दे पाते हैं तो मन को शांति और आंतरिक खुशी मिलती है। मन की शांति, प्रसन्नता और संतुष्टि ही वो चीजें हैं जो व्यक्ति के कल्याण के लिए आवश्यक हैं। मानसिक रूप से सहज व्यक्ति ज़्यादा संतुष्ट और सुखी रहता है, उसके मन में सबके प्रति प्रेम होता है, वह हर चीज़ के धनात्मक पक्ष को देखता है और अनवरत स्वयं के प्रति, अपने परिवार और समाज के प्रति कल्याणकारी व्यवहार करता है।
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