कसया/कुशीनगर। नगर के वार्ड संख्या 22 महन्थ अवैद्यनाथ नगर (सिसवा – महन्थ) रंगमंच, ललित कला एवं साहित्य को समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती द्वारा आयोजित कजरी महोत्सव में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक लोक लुभावन व मन भावन कजरी की प्रस्तुति कर सबका मन मोह लिया।

वार्ड निवासी जितेंद्र शर्मा के आवास पर आयोजित कजरी महोत्सव की शुरुआत विघ्न विनाशक प्रथम पूज्य देवता गणेश की प्रतिमा पर पूजन अर्चन कर किया गया। गणेश वंदना सुनंदा शर्मा और सुनिधि शर्मा ने प्रस्तुत किया। कजरी गायन में कलाकारों ने मेहंदी लिया द मोती झील से, धनि हो खोल ना हो केवड़िया, बतिया मान बलम कलकतिया हमके गढ़ाई द नथिया ना, कईसे खेलन जइबू सावन में कजरिया, हरे रामा भींजत मोर चुनरिया, रेलिया बैरन पिया के लेई जात रे आदि कजरी गीतों को सुनंदा, निधि, अर्पिता शर्मा, किरन जायसवाल, पूजा पाण्डेय, प्रतीक्षा सिंह, अशोक कुमार, धीरज राव, ऋषभ राव, रवि पाठक, अतुल भारती ने प्रस्तुत कर खूब बाहबही लूटी। डॉ अम्बरीष कुमार विश्वकर्मा ने अपने गीत ‘मिर्जापुर कईल गुलजार हो, कचौड़ी गली सुन कईल बलमू ..’ गाकर कजरी महोत्सव को ऊंचाई दी। मुख्य वक्ता सुरेश प्रसाद गुप्ता ने सबका परिचय कराते हुए कहा कि कजरी देश की प्राचीन विधा है। जब काली घटा हो और बिजली चमक रही हो, बारिस की रिमझिम फुहार हो ऐसे प्राकृतिक छटा में संयोग, वियोग का गीत कजरी सुनना मन भावन हो जाता है। संचालन करते हुए दिनेश कुमार तिवारी भोजपुरिया ने कजरी विधा की विधिवत जानकारी दी। भन्ते महेंद्र ने आशीर्वचन दिया।

कार्यक्रम संयोजक संस्था कोषाध्यक्ष महादेव प्रसाद गुप्ता व रविन्द्र विश्वकर्मा राधे ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। अध्यक्षता जिला संघ चालक डॉ चंद्रशेखर सिंह ने किया। इस दौरान त्रिभुवन त्रिपाठी, अरुण राय, देवेंद्र कुमार राय, डीके पाण्डेय, विकास श्रीवास्तव, हृदया नन्द शर्मा, जनार्दन जी, सत्यदेव गुप्ता, मदन आग्रहरी, सुरेंद्र पांडेय, वीरेश राय, गेंदा सिंह, रामाश्रय यादव, प्रमोद सिंह, दिनेश जायसवाल, देंवेंद्र शर्मा, नयन, कृष, सुबोध शर्मा, तुलसी देवी, सुनील शर्मा,अर्चना शर्मा, कृतिका आदि मौजूद रहे।