Uttarakhand Uniform Civil Code Bill: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज यूनिफॉर्म सिविल कोड को विधानसभा सदन में पेश कर दिया है. यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने यह विधेयक पेश किया। मुख्यमंत्री द्वारा विधेयक पेश किए जाने के इस दौरान सत्तापक्ष के विधायकों ने ‘भारत माता की जय, वंदे मातरम और जय श्रीराम” के नारे भी लगाए। इस दौरान विपक्षी विधायकों ने जमकर हंगामा किया और सदन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
1- लड़कियों की विवाह की आयु बढ़ाई जाएगी ताकि वे विवाह से पहले ग्रेजुएट हो सकें।
2- विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होगा बगैर रजिस्ट्रेशन किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नही मिलेगा। ग्राम स्तर पर भी शादी के रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी।
3- पति-पत्नी दोनो को तलाक के समान आधार उपलब्ध होंगे। तलाक का जो ग्राउंड पति के लिए लागू होगा, वही पत्नी के लिए भी लागू होगा। फिलहाल पर्सनल लॉ के तहत पति और पत्नी के पास तलाक के अलग अलग ग्राउंड हैं।
4- पॉलीगैमी या बहुविवाह पर रोक लगेगी।
5- उत्तराधिकार में लड़कियों को लड़कों के बराबर का हिस्सा मिलेगा।
6- नौकरीशुदा बेटे की मृत्यु पर पत्नी को मिलने वाले मुआवजे में वृद्ध माता-पिता के भरण पोषण की भी जिम्मेदारी। अगर पत्नी पुर्नविवाह करती है तो पति की मौत पर मिलने वाले कंपेंशेसन में माता पिता का भी हिस्सा होगा।
7- मेंटेनेंस- अगर पत्नी की मृत्यु हो जाती है और उसके माता पिता का कोई सहारा न हो, तो उनके भरण पोषण का दायित्व पति पर होगा।
8- एडॉप्शन- सभी को मिलेगा एडॉप्शन का अधिकार। मुस्लिम महिलाओं को भी मिलेगा गोद लेने का अधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया आसान की जाएगी।
9- हलाला और इद्दत पर रोक होगी।
10- लिव इन रिलेशनशिप का डिक्लेरेशन आवश्यक होगा। ये एक सेल्फ डिक्लेरेशन की तरह होगा जिसका एक वैधानिक फॉर्मैट होगा। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों को अपनी जानकारी देना अनिवार्य होगा और ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को अपने माता-पिता को जानकारी प्रदान करनी होगी.
11- गार्जियनशिप- बच्चे के अनाथ होने की स्थिति में गार्जियनशिप की प्रक्रिया को आसान किया जाएगा।
12- पति-पत्नी के झगड़े की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उनके ग्रैंड पैरेंट्स को दी जा सकती है।
13- जनसंख्या नियंत्रण को अभी सम्मिलित नहीं किया गया है।
14- विवाह कॉन्ट्रैक्ट नहीं परमानेंट
15- तलाक-ए-हसन, तलाक-ए-अहसन, तलाक ए बाईन, तलाक-ए-किनाया खत्म। अब सबका तलाक कोर्ट से होगा और कूलिंग पीरियड 6 माह होगी।
16- निकाह हलाला, निकाह मुताह, निकाह मिस्यार और दारुल कजा (शरिया कोर्ट) खत्म।
17- खतना पर कोई रोक नहीं है।
प्रदेश मंत्रिमंडल ने रविवार को UCC मसौदे को स्वीकार करते हुए उसे विधेयक के रूप में सदन के पटल पर रखे जाने की मंजूरी दी थी। चार खंडों में 740 पृष्ठों के इस मसौदे को सुप्रीम कोर्ट की रिटायर जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री को सौंपा था।
उत्तराखंड सरकार ने इस कानून को पेश करने के लिए सोमवार से विधानसभा का चार दिवसीय विशेष सत्र बुलाया, जिससे राज्य भर में नागरिक संहिता के प्रभाव के बारे में गहन बहस शुरू हो गई। सदन की कार्यवाही आज (6 फरवरी) दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
UCC पर अधिनियम बनाकर उसे प्रदेश में लागू करना 2022 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा जनता से किए गए प्रमुख वादों में से एक था। वर्ष 2000 में अस्तित्व में आए उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचने के बाद BJP ने मार्च 2022 में सत्ता संभालने के साथ ही मंत्रिमंडल की पहली बैठक में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन को मंजूरी दे दी थी।
कानून बनने के बाद उत्तराखंड आजादी के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने वाला देश का पहला राज्य होगा। गोवा में पुर्तगाली शासन के दिनों से ही UCC लागू है। UCC के तहत प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए एकसमान विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, जमीन, संपत्ति और उत्तराधिकार के कानून लागू होंगे चाहे वे किसी भी धर्म को मानने वाले हों।
तुर्कपट्टी। पटहेरवा थाना क्षेत्र के काजीपुर गांव के पास एक निर्जन जगह पर जुआ…
खड्डा/कुशीनगर। खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव निवासी एक महिला ने मंगलवार की भोर…
कुशीनगर । तमकुही विकास खंड के ग्राम पंचायत बरवाराजापाकड़ निवासी व उत्तराखंड प्रदेश के…
बंगरा निवासी गुलाम का वित्त विभाग में राज्य कर अधिकारी के पद पर हुआ…