उत्तरप्रदेश में भगवा गमछा पहनने और तिलक लगाने पर साधु की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By: न्यूज अड्डा डेस्क
Published on: Jul 15, 2020 | 5:37 PM
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक साधु की पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक समुदाय विशेष के युवक ने भगवा गमछा पहनने और तिलक लगाने को लेकर एक साधु पर टिप्पणी की थी, जब उन्होंने इसका विरोध किया तो युवक ने साधु को बीच सड़क पर जमकर पीटा। इसके बाद मौके से फरार हो गया। इलाज के दौरान साधु ने दम तोड़ दिया। घटना मेरठ के भगवानपुर क्षेत्र में पड़ने वाले अब्दुल्लापुर की है।
साधु के साथ हुई इस घटना के बाद लोगों में काफी गुस्सा है। बुधवार को बजरंग दल और विहिप कार्यकर्ताओं ने परिजनों को साथ लेकर साधु कांति प्रसाद का शव अब्दुल्लापुर में सड़क पर रख दिया और जाम लगा दिया। हंगामा करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार करने और एसओ को सस्पेंड करने की मांग की गई। इस दौरान घंटों तक बवाल होता रहा। कैंट विधायक और जिला पंचायत सदस्य भी पहुंच गए। आखिर में आर्थिक मदद और एसओ और एसएसआई को लाइन हाजिर करने पर शव का अंतिम संस्कार किया गया।

आरोपियों की धर-पकड़ और मुआवजे की मांग को लेकर हंगामा

अब्दुल्लापुर में मंदिर के सेवक कांति प्रसाद के साथ अनस नाम के युवक ने भगवा गमछा पहनने और तिलक लगाने को लेकर 13 जुलाई को मारपीट की थी। 14 जुलाई को उपचार के दौरान कांति प्रसाद की मौत हो गई। बुधवार सुबह करीब आठ बजे बजरंग दल और विहिप कार्यकर्ताओं ने कांति प्रसाद का शव अब्दुल्लापुर में किला रोड पर रख दिया और जाम लगा दिया। पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर दी। पुलिस पर हिस्ट्रीशीटर नदीम मेवाती से संबंधों का आरोप लगाया। इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली को विवादित बताते हुए आरोपियों की धरपकड़, एसओ को हटाने और मुआवजे की मांग की गई।

प्रशासन ने दिया मदद का भरोसा

एसपी देहात अविनाश पांडेय, सीओ सदर देहात और आसपास के चार थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। मामला काबू करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं बनी। पुलिस ने सख्ती भी की, लेकिन भीड़ नहीं मानी और पुलिस से तीन बार झड़प हुई। अधिकारियों के धमकाने के बावजूद लोग सड़क पर डटे रहे। इसके बाद विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य रोहतास पहलवान और बलराज डूंगर समेत बाकी लोग भी पहुंच गए। मामले में एसएसपी अजय साहनी से बात की गई, जिसके बाद एसओ और एसएसआई को लाइन हाजिर कर दिया गया। आर्थिक मदद के लिए 25 लाख रुपए की रिपोर्ट बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई और साथ ही कांति प्रसाद की पत्नी की पेंशन शुरू करने का आश्वासन दिया गया।

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