कसया। साथी सेवा समिति आहिरौल राजा के तत्वावधान में रविवार को उत्तर प्रदेश हिन्दी सन्सथान के द्वारा गठरी किताब पर सम्मानित हो चुके चन्देश्वर शर्मा परवाना के द्वारा लिखी मकरंद पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम समारोह पूर्वक समपन्न हुआ जिसमें वक्ताओं ने किताब के बारे मे बिस्तार पूर्वक बताया और उसके अन्दर लिखे गीतों पर प्रकाश डाला
कार्यक्रम को सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण कर दीप प्रज्जवलन उपरांत अतिथियों का स्वागत सूत की माला से किया। अपने स्वागत भाषण में सतोष सिंह ने कहा इस भगवान बुद्ध एवं महाबीर की धरती के भूमि के क्षेत्र पर मां नर्मदा जी की कृपा है यहां साहित्य आयोजनों का अनवरत सिलसिला चलता रहता है। इस पवित्र भूमि में अनेक महान हस्तियों ने जन्म लिया है और आने वाली पीढ़ी उनके पदचिन्हों पर चल रही हैं। तालियों की गडग़डाहट के बीच मंचासीन अतिथियों ने वरिष्ठ साहित्यकार चन्देश्वर शर्मा परवाना के द्वारा लिखी हिन्दी संग्रह ‘ की पुस्तक मकरंद का विमोचन किया गया । पुस्तक की समीक्षा प्रोफेसर अरबिंद तिवारी, व बिरेन्द्र तिवारी, बार एशोसिएशन के अध्यक्ष बीरेंद्र श्रीवास्तव, ने प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि सासद बिजय दूबे ने कहा कि ‘साहित्य समाज से प्रेरणा लेता है और साहित्य समाज को प्ररेणा देता भी है। मेरे व्यंग्य समाज की विषमताओं से निकली अभिव्यक्ति है। हमारे लिए गौरव की बात है कि यहां सौ वर्ष पुराना पुस्तकालय है जो साहित्य की अभिरूचि को जाग्रत किए हुए है। मकरंद पुस्तक पढकर हिन्दी की कइ रूप देखने को मिल रहा है बिशिष्ट अतिथि विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि साहित्य समाज के दर्पण के रूप में काम करता है, चन्देश्वर शर्मा परवाना के द्वारा यह लिखी पुस्तक की साहित्य चेतना अद्भुत है। उन्होंने महाकवि मैथलीशरण गुप्त की काव्य पंक्तियों को उदघृत करते हुए कहा साहित्य निज मनुष्यता का परिचायक है। भंते महेंद्र ने कहा हमारे देश की संस्कृति अद्भुत है साम्प्रदायिक सदभाव की मिशाल है। किसी के पास हिन्दु-मुस्लिम एकता को तोडऩे की ताकत नहीं है। हमारे मजहब भले ही अलग हों पर संस्कार एक हैं। उन्होंने कहा कि रामराज्य का मतलब सुशासन है और एक अच्छा सुशासन हर देशवासी चाहता है। उन्होंने राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम का हिन्दी अनुवाद करते हुए कहा कि इस गीत में हमारे देश की माटी का चित्रण है। राज्य मत्री भिब्रराट सिंह कौशिक ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य कालजयी होता है किसी साहित्यकार की कृति ऐतिहासिक दस्तावेज होती है। अध्यक्षता करते हुए हरिनाथ भाई ने कहा कि इस किताब में लिखे एक एक गीत सभी प्रकार के रुपांतरण कर रहा है कार्यक्रम की सन्चालन मृतुजय उपधयाय नवल ने किया
प्रथम चरण के उपरांत दूसरे चरण में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें डॉक्टर घनश्याम तिवारी शैलेंद्र असीम त्रिल्लोकी तिवारी कृष्ण कुमार श्रीवास्तव हरिकृष्ण पाडेय सत्यम बदा शर्मा उगम चौधरी मगन आदि ने अपनी रचनाओं को सुनाया इस दौरान गायक मंटू पाठक,धीरज राव,सुनील मिश्र,अश्विनी दुबे एवं पूजा पांडेय ने मकरंद से कुछ रचनाओं का सस्वर पाठ कर मन मोह लिया…इस अवसर पर मनोज प्रजापति , चंद्रिका शर्मा, आंनद राय, सत्यप्रकाश राव, संजय शुक्ला, ओमप्रकाश वर्मा, नीतीश गोंड़, जहाँगीर, साहिल, मोनू राव, अमन, अमित, राजकुमार, करम सिंह, अक्षय पांडेय, कृष्ण मुरारी जायसवाल, सफदर, जितेंद्र सिंह, विनय सिंह आदि मौजूद रहे।
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