Reported By: Surendra nath Dwivedi
Published on: Aug 22, 2025 | 5:02 PM
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कुशीनगर। खड्डा थाना एक बार फिर सुर्खियों में है। थाने पर तैनात चर्चित सिपाहियों का ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि तीन दिनों तक युवकों को थाने में बिठाकर रखा गया, पिता के सामने ही मारपीट की गई और रुपये लेकर समझौते की डील कर दी गई। मामला गंभीर होते ही पुलिस अधीक्षक कुशीनगर संतोष कुमार मिश्रा ने इसकी जांच क्षेत्राधिकारी (CO) खड्डा को सौंपी है।
खड्डा थाना क्षेत्र के तुकर्हां गांव निवासी मुसाफिर पुत्र जहांगीर ने बुधवार को एसपी कुशीनगर को प्रार्थना पत्र देकर सनसनीखेज आरोप लगाए। उसने बताया कि 15 अगस्त की दोपहर करीब 1:30 बजे एक सिपाही उसे घर से उठा लाया और फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी देते हुए करीब 36 घंटे तक थाने में बिठाए रखा।
इस दौरान उसकी पिटाई भी की गई और उससे ₹1 लाख की मांग की गई। आरोप है कि बाद में पिता और बड़े भाई वजीर को भी थाने बुलाया गया। पिता के सामने ही थाने के चर्चित सिपाहियों ने फिर मारपीट की। आखिरकार ब्याज के पैसों से ₹50 हजार देने के बाद मुसाफिर और उसके भाई को छोड़ा गया, लेकिन शांति भंग की धारा में चालान कर दिया गया।
मुसाफिर ने पूरी घटना का ब्योरा एसपी कुशीनगर को सौंपते हुए तीनों सिपाहियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई.
जानकारी के मुताबिक, आरोपित सिपाहियों में से दो का विवादों से गहरा रिश्ता रहा है। ये पहले भी जिले के अन्य थानों पर अपनी करतूतों के चलते चर्चित रहे हैं और लंबे समय तक पुलिस लाइन में अटैचमेंट की सजा भुगत चुके हैं। इसके बावजूद इनकी हरकतें थमती नहीं। खड्डा थाने पर तैनाती के दौरान भी इनके खिलाफ लगातार शिकायतें उठती रही हैं।
अब यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा है। स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि पीड़ित के आरोपों के पुख्ता ऑडियो और वीडियो सबूत मौजूद हैं, जिन्हें जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा।
एसपी कुशीनगर ने मामले की जांच क्षेत्राधिकारी खड्डा को सौंपी है। अब देखना होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपी सिपाहियों पर पुलिस महकमा क्या कार्रवाई करता है।
यह मामला सिर्फ एक थाने के नहीं, बल्कि पुलिस की छवि और आमजन के भरोसे से जुड़ा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच का नतीजा क्या निकलता है—न्याय या लीपापोती?