कुशीनगर। जनपद में भारतीय राष्ट्रीय राज मार्ग प्राधिकरण के अधीन राष्ट्रीय राजमार्ग पर कराए गए सुदृढ़ीकरण कार्य को लेकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। कार्यदायी संस्था और परियोजना निदेशक की कथित युगलबंदी अब सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से एनएच‑27 पर कसया से लेकर उत्तर प्रदेश–बिहार सीमा तक लगभग 36 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण कराया गया, लेकिन मानकों की खुलेआम अनदेखी हुई।
मानक के अनुसार सड़क किनारे डेढ़ मीटर सोल्डर का निर्माण होना था, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि एक मीटर सोल्डर का काम भी कई हिस्सों में नहीं कराया गया। आरोप है कि यह सब परियोजना निदेशक कार्यालय के वरदहस्त के बिना संभव नहीं।स्थानीय लोगों का कहना है कि डीबीएम और बीसी की परतें डालने के बाद भी सोल्डर पर कोई ठोस कार्य नहीं दिखता।
सूत्रों के अनुसार सुदृढ़ीकरण के दौरान कार्यदायी संस्था गणेश बिल्डर्स द्वारा मिलिंग मैटेरियल को गोरखपुर स्थित परियोजना निदेशक कार्यालय की निगरानी में अवैध रूप से बेचा गया। यही नहीं, सोल्डर कार्य के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जी भुगतान कर भ्रष्टाचार को अंजाम देने का आरोप भी लगाया जा रहा है।
धीरे-धीरे खुल रही परतें यह इशारा कर रही हैं कि यह मामला केवल तकनीकी खामियों तक सीमित नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का है। जागरूक नागरिकों ने पूर्व में उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन अब तक कार्रवाई ‘ढाक के दो पात’ ही साबित हुई है।
बहरहाल, यह पूरा प्रकरण उच्चस्तरीय जांच की मांग करता है। सवाल साफ है—जब सड़क किनारे सोल्डर ही नहीं, तो भुगतान किस काम का? यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई और नुकसान की भरपाई अनिवार्य होगी। अब निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि एनएच-27 के ‘सोल्डर घोटाले’ पर कब तक पर्दा उठता है।
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