उत्तर प्रदेश | देश के सभी राज्यों में पूर्व विधायकों को अलग अलग सैलरी मिलती है। वही अगर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की बात करे तो यहाँ पर लगभग 2200 पूर्व है इनमे से कुछ का निधन भी हो हो जाने के कारण उनकी आश्रित पत्नियों को दस हजार रुपये की पेंशन मिल रही है. उत्तर प्रदेश में विधायक के हर कार्यकाल के बाद पेंशन बढ़ती जाती है। इससे सरकार के खजाने पर करीब 65 करोड़ प्रति वर्ष का पेंशन बोझ पड़ रहा है.
दुनिया के अनेक देशों में जनप्रतिनिधियों को वेतन और सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, इसे वह खुद नहीं तय करते हैं बल्कि इसे तय करने का अधिकार अलग संस्थाओं को रहता है। इसके लिए उम्र और सेवा की सीमा तय है। वहीं, ब्रिटेन जैसे देश में इसके लिए आयोग का गठन किया गया हैं। हालांकि, भारत में सांसद व विधायकों की सुविधाओं के संबंध में क्रमश: संसद व विधानसभाएं ही फैसला लेती हैं।
कनाडा में सालाना बढ़ोतरी: हर साल तय होती है और ये पिछले साल के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित होती है।
ब्रिटेन में है आयोग: इंडिपेंटेंड पार्लियामेंट्री स्टैंडर्ड अथॉरिटी में शामिल सांसद, ऑडिटर और पूर्व जज तय करते हैं। सैलरी में सालाना संशोधन होता है, जो पब्लिक सेक्टर की औसत इनकम के अनुसार होता है।
ऑस्ट्रेलिया में एक्सपर्ट्स तय करते हैं: सरकार, इकोनॉमी, कानून और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के एक्सपर्ट्स तय करते हैं, सालाना संशोधित होती है।
न्यूजीलैंड में स्वतंत्र संस्था तय करती है: जज, सांसद और स्वतंत्र कानूनी संस्थाएं तय करती हैं, ये सदन में सांसद या विधायक के पद पर आधारित होती है।
फ्रांस में सिविल सेवकों की सैलरी से तय होता है: हाईएस्ट ग्रेड वाले सबसे ज्यादा और सबसे कम सैलरी वाले सिविल सेवकों की सैलरीज के औसत से तय होती है। सिविल सेवकों की सैलरी को सदन के कोषाध्यक्ष (तीन सांसद) तय करते हैं।
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