कुशीनगर। जिले से होकर गुजरने वाले एनएच-27 पर चल रहे सुदृढ़ीकरण कार्य में भ्रष्टाचार का खेल खुलकर सामने आता जा रहा है। कार्यदाई संस्था और परियोजना निदेशक की कथित युगलबंदी के चलते कार्यों की गुणवत्ता में लगातार गड़बड़झाला हो रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसकी जांच और निगरानी करने वाले वरीय अधिकारी अब तक कुंभकर्णी निद्रा में हैं।
जागरूक नागरिकों का कहना है कि परियोजना निदेशक की कार्यशैली पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। जानकारी के अनुसार एनएच-27 कसया से यूपी-बिहार बॉर्डर तक सड़क के सुदृढ़ीकरण कार्य में कार्यदाई संस्था गणेश बिल्डर्स और परियोजना निदेशक कार्यालय गोरखपुर द्वारा प्राधिकरण के मानकों को ताक पर रखकर पीजीआर (PGR) लगाया जा रहा है।
स्थानीय जानकारों का दावा है कि प्राधिकरण के नियमों के अनुसार पीजीआर की नींव गुणवत्ता युक्त बालू और सीमेंट से तैयार की जानी चाहिए, लेकिन मौके पर बालू के स्थान पर मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सड़क की मजबूती और आमजन की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
हाईवे पर हो रहे इस गैर-जिम्मेदाराना कार्य के बावजूद परियोजना निदेशक की चुप्पी आमजन की समझ से परे है। सूत्रों की मानें तो यह पूरा गड़बड़झाला कार्यदाई संस्था और परियोजना निदेशक की आपसी मिलीभगत का हिस्सा बताया जा रहा है।
नहीं उठा फोन ..!
इस संबंध में संवाददाता द्वारा परियोजना निदेशक का पक्ष जानने के लिए कई बार दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव न होने के कारण उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी समय रहते जांच कर कार्रवाई करेंगे, या एनएच-27 पर भ्रष्टाचार का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
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