फाजिलनगर /कुशीनगर। विधानसभा फाजिलनगर (३३२) के सपा प्रत्याशी मा० स्वामी प्रसाद मौर्य को भारी मतों से विजयी बनाने के लिए जनसम्पर्क अभियान में जुटे सपा जिला सचिव चौधरी शमसुल होदा ने कहा कि भाजपा द्वारा देश में की जा रही हिन्दू बनाम मुस्लिम की राजनीति का लक्ष्य पूर्णरूप से सामाजिक व राजनीतिक व्यवस्था पर अपना वर्चस्व स्थापित करना है। जो देश की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर कर वर्चस्ववादी व्यवस्था को मजबूत करने वाला है। सामाजिक व्यवस्था वर्चस्ववादियों के नियंत्रण में है, इसलिए राजनीतिक नियंत्रण उनके हाथ में है।
अब विचार कीजिये कि यदि इनके हाथों में समाज की आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर नियंत्रण हो जाता तो फिर समस्त मानव समाज को गुलाम बनने में देरी नहीं लगती। जिसके लिए काले तीनों कृषि कानून लेकर आये थे। जिसे किसान आंदोलन के आगे मजबूर होकर वापस लेना पड़ा है। भाजपा का सत्ता में रहते कृषि कानून को लेकर बराबर भय बना रहेगा।
चौधरी शमसुल होदा ने आगे कहा कि संवैधानिक व्यवस्था ने लिखित रूप से राज व्यवस्था दिया है. उसका मूल मंत्र है “जिसकी संख्या भारी-वही है देश का प्रभारी”। इसी को लोकतांत्रिक व्यवस्था कहते हैं। संवैधानिक व्यवस्था बनाम सामाजिक धार्मिक व्यवस्था का सबसे जवलंत उदाहरण यह है कि अनुसूचित जाति के मा० रामनाथ कोविंद जी जो संवैधानिक व्यवस्था के अन्तर्गत महामहीम राष्ट्रपति बने हैं। यानिकि प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया, भारत देश का प्रथम व्यक्ति जो देश की थल, जल और वायु तीनों सेनाओं के अध्यक्ष हैं। वह महामहीम राष्ट्रपति महोदय जब वर्ष-२०१८ में उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी में दर्शन को जाते हैं तो उन्हें मन्दिर के पुजारियों द्वारा मन्दिर के अंदर जाकर भगवान का दर्शन व पूजा करने से रोक दिया जाता है। फिर वे बाध्य होकर मन्दिर की सीढ़ियों से ही पूजा करते हैं। इसको लेकर देश में बहुत हो हल्ला मचा था।
यह है सामाजिक धार्मिक व्यवस्था जो देश की संवैधानिक व्यवस्था की अपंग बनाता है। अनुसूचित जनजाति के जीतन राम मांझी जो बिहार प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके है। उनके द्वारा काली मन्दिर में पूजा किये जाने के बाद मंदिर को गंगाजल व गऊ मूत्र से धोया गया। पिछड़ी जाति के माननीय अखिलेश यादव जी जो वर्तमान में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वे २०१२ से २०१७ तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. २०१७ में भाजपा के योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री बने तो मुख्यमंत्री आवास के सभी फर्नीचर, सोफा, बेड आदि बदले गये। फिर योगी बाबा ने वहां तीन दिन तक हवन यज्ञ कराया। उसके बाद भी जब मुख्यमंत्री आवास पवित्र नहीं हुआ तो फिर काशी, मथुरा, रामेश्वर आदि नव स्थानों से गंगाजल मंगाया गया और उसका छिड़काव किया गया। तब भी मुख्यमंत्री आवास पवित्र नहीं हुआ। अंत में गऊमूत्र से जब छिड़काव हुआ तब मुख्यमंत्री आवास पवित्र हुआ और योगी बाबा के रहने योग्य हुआ। अर्थात दलित समाज के महामहिम राष्ट्रपति महोदय, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ी जाति के पूर्व मुख्यमंत्री महोदयगण सामाजिक धार्मिक व्यवस्था में अछूत हैं और गऊमूत्र से भी गये गुजरे हैं। यह व्यक्तिगत रूप से किसी एक व्यक्ति/नेता का अपमान नहीं है, बल्कि पूरे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़े वर्ग का अपमान है। विचार कीजिये कि जब ऐसे उच्च पदों पर रहने व रह चुके महान व्यक्तित्व के साथ जब वर्चस्ववादियों का यह व्यवहार है तो दलित, अनुसूचित जनजाति व पिछड़े वर्ग के साधारण जनों के साथ क्या होगा? यही नहीं महिलाओं की सशक्तिकरण व सम्मान की बात करने वाली भाजपा सरकार में बाबाजी मुख्यमंत्री की उपस्थिति में पिछड़ेवर्ग के कार्यक्रम में पिछड़ेवर्ग की माननीया महिला सांसद को बोलने नहीं दिया जाता है।
पूर्व सांसद माननीया सावित्री बाई फुले जो अनुसूचित जाति से आती हैं को लखीमपुरखीरी जाते समय उनके साथ एक अपराधी जैसा दुर्व्यवहार व अपमान किया जाता है। इससे साबित होता है कि भाजपा के कथनी और करनी में जमीन व आसमान का अंतर है। भाजपा सरकार द्वारा “कहीं पर निगाहें और कहीं पर निशाना” का खेल खेला जा रहा है।
बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती जी वर्चस्ववादियों के चंगुल में फंसकर बाबा साहब डॉ० भीमराव आंबेडकर व मान्यवर कांशीराम जी के सपनों को तिलांजलि देने पर आमादा हैं। जिला सचिव चौधरी शम्स ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़े वर्ग के लोगों को जो सामाजिक वर्ण-व्यवस्था के अनुसार शुद्र हैं, वे संगठित होकर एक लक्ष्य बनाकर फासिस्टवाद, पूंजीवाद, दक्षिणपंथवाद व कट्टर साम्प्रदायिकता के संयुक्त गठबंधन के हाथों संचालित भाजपा सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लें। जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता प्राप्त नहीं कर लेते, कानून आपको जो भो स्वतंत्रता देता है वो आपके लिए निरर्थक है। सामाजिक गौरव प्राप्ति के लिए सामाजिक एकजुटता के साथ राजनीतिक निर्णय लेने होंगे। भाजपा के हिन्दू बनाम मुसलमान के मकड़जाल से बाहर निकलना होगा। दलित समाज, जनजाति समाज, पिछड़ेवर्ग, अल्पसंख्यक समाज, वंचितों, महिलाओं, किसानों, मजदूरों, व्यपारियों, युवाओं, छात्रों-छात्राओं, समाजसेवियों, कलमकारों आदि को अपने हितों की रक्षा करने वाले नेता व दल की पहचान कर उसे मजबूत करने की दिशा में ईमानदार प्रयास करने होंगे।
जिला सचिव चौधरी शम्स ने आगे कहा कि अंबेडकरवाद व लोहियावाद को व्यवहारिक रूप देने व दलितों, जनजातियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं आदि को सामाजिक न्याय दिलाने का संकल्प लेने वाले मा० स्वामी प्रसाद मौर्य जी विधानसभा फाजिलनगर (३३२) से सपा प्रत्याशी हैं। सामाजिक न्याय की प्राप्ति के लिए सामाजिक एकजुटता जरूरी है। बाबा साहब डॉ० भीमराव अंबेडकर व डॉ० राममनोहर लोहिया के सपनों को धरातल पर व्यवहारिक रूप देने के लिए समाजवादी पार्टी के बैनर तले एकत्रित होकर अपने संवैधानिक अधिकारों व सामाजिक गौरव की प्राप्ति के लिए मा० स्वामी प्रसाद मौर्य को भारी मतों से जीताने व मा० अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लेकर समाजवादी गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करें। मा० अखिलेश यादव नेतृत्व में समाजवादी गठबंधन की सरकार बनाये बिना संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय व गौरव की कल्पना निरर्थक है।
इस दौरान पूर्व अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक लखनऊ, पूर्व ब्लॉक प्रमुख लकी खान, युवा नेता शाहनवाज खान, मेहराब खान, मिनहाज़ खान, डॉ० सलामत अंसारी, लखीचन्द यादव, राजकिशोर जयसवाल, प्रधान संजय यादव, प्रधान नबीरसूल अंसारी, पूर्वप्रधान हरेंद्र यादव, पूर्वप्रधान काशीनाथ पांडेय, पूर्वप्रधान कमरुल होदा, पूर्वप्रधान सुभाष यादव, पूर्वप्रधान फौजदार प्रसाद, रामनरेश प्रसाद, सुभाष प्रसाद, रामचन्द्र चौहान, मोबीन शेख, मैनुद्दीन सिद्दीकी, सुभाष प्रसाद मौर्य, रामचन्द्र यादव, नौशाद अहमद, अनवर खान उर्फ बेचू, रिजवान खान, अब्दुल मतीन खान, लालबाबू यादव, हरेंद्र कुशवाहा, नन्दलाल कुशवाहा, आनन्द कुशवाहा, मुमताज़ खान, मंसूर अली, ताज मोहम्मद आदि सैकड़ों समाजवादी नेतागण व समर्थकजन मौजूद रहे।
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