फाजिलनगर/कुशीनगर। विधानसभा फाजिलनगर (३३२) के सपा प्रत्याशी व पूर्व कैबिनेट मंत्री मा० स्वामी प्रसाद मौर्य को विजयी बनाने के लिए जनसम्पर्क अभियान में लगे सपा जिला सचिव चौधरी शमसुल होदा ने कहा कि मुल्क़, मुल्क़ की आवाम और मुल्क़ के संविधान से मुहब्बत करना मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। सियासी क़ामयाबी के लिए सियासत के साथ साथ हिकमत का होना जरूरी है। हालात का सही तजवीज़ के साथ फैसला लेना ही हिकमत है। आज मुल्क़ के मौजूदा हालात पर नजर डालें तो पाएंगे कि पूंजीपतियों, दक्षिणपंथियों, कट्टर साम्प्रदायिकता के संयुक्त गठबंधन की हाथों की कठपुतली भाजपा सरकार से देश, संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय सम्पतियों, लोकतांत्रिक ढांचों, साम्प्रदायिक सौहार्द, भाईचारा आदि को खतरा पैदा हो गया है। भाजपा के हिन्दू बनाम मुसलमान, बंटवारे व नफरत की राजनीति से सभी लोग तंग आ चुके हैं। ऐसे हालात में जिस मुस्लिम क़ौम के ईमान का हिस्सा वतनपरस्ती का है वह देश, संविधान, लोकतंत्र, देश की संपत्तियों-संसाधनों, सामाजिक न्याय, साम्प्रदायिक सौहार्द, भाईचारे को बचाने को अहमियत देगा, न कि मुस्लिम चेहरे को। मुस्लिम समाज को इस हक़ीक़त को समझने की जरूरत है कि आज मौजूदा वक़्त में जज्बाती लीडरशिप की खुदगर्ज़ी ने मुस्लिम क़ौम को गुमराह कर अपना काम बनाने में जुट गये हैं। जो लोग अभी कुछ दिन पहले बसपा को भाजपा की टीम बताते हुए यह कहते नहीं थकते थे कि बसपा को वोट देने से बेहतर है कि भाजपा को वोट कर दे। आज वक़्त ने ऐसा करवट मारा कि घड़ियाली आंसू के साथ बसपा का टिकट लेकर मुस्लिम समाज से बसपा के लिए वोट मांग रहे हैं।ऐसे बहुरूपिए अपनी राजनीतिक खुदगर्जी के चलते मुस्लिम समाज को गुमराह कर उनका वोट बसपा के नाम पर कराकर छुपे तौर पर उस भाजपा को सत्ता में बनाये रखने का काम कर रहे हैं जो खुले तौर पर संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, मानवता, भाईचारा, साम्प्रदायिक सौहार्द विरोधी है। भारत देश के सबसे बड़े प्रदेश “उत्तरप्रदेश” में २०२२ का यह विधानसभा चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण चुनाव है। इस चुनाव में प्रदेश की जनता को देश, संविधान, लोकतंत्र, लोकतांत्रिक संस्थानों, देश की प्राथमिक आधारभूत संरचनाओं की रक्षा व बेरोजगारी, महंगाई, फासिस्टवाद, पूंजीवाद, वर्चस्ववाद, संघवाद से छुटकारा के लिए मतदान करने हैं।
सपा जिला सचिव चौधरी शमसुल होदा ने आगे कहा कि प्रदेश की जनता, मीडिया के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों को यह भलीभांति पता है कि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का सीधा मुकाबला भाजपा से है। भाजपा भी इस वास्तविकता से भलीभांति परिचित है। प्रदेश की जनता का लक्ष्य है फासिस्टवादी भाजपा सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकना। ऐसे में अपनी राजनीतिक दुकानदारी को चमकाने के लिए अपने मुस्लिम समाज को दिगभ्रमित कर मुख्य उद्देश्य से भटकाता है तो वह भाजपा का मददगार ही समझा जाएगा। बसपा को सच्चा मुसलमान कभी वोट नहीं करेगा। अगर बसपा सुप्रीमो टीवी पर आकर खुलेतौर पर यह कह सकती हैं कि मुसलमान कट्टरपंथी होता है इस वजह से हमने बसपा का वोट भाजपा को ट्रांसफर करा दिया। इसके बाद भी अगर मुसलमान बसपा को वोट देता है तो मतलब साफ है कि वह छुपे तौर पर इंसानियत व भाईचारे के दुश्मन भाजपा को वोट दे रहा है। बसपा से दलित भाइयों ने दूरी बनाना शुरू कर दिए हैं और मिशन चलाकर यह अपने समाज को जागरूक कर रहे हैं कि भाजपा शासन में दलितों पर खुलेआम अत्याचार हो रहा है और बसपा सुप्रीमो मायावती जी संघवादी मानसिकता के व्यक्ति एडवोकेट सतीश चंद्र मिश्रा के इशारे पर कठपुतली की तरह व्यवहार कर रही हैं और मौका बे मौका भाजपा को समर्थन देने की बात खुले तौर पर कर रही हैं। बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती जी ने बाबा साहिब डॉ० भीमराव अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम जी के सपनों को रौंद रही हैं।
सपा जिला सचिव चौधरी शम्स ने आगे कहा कि मौजूदा वक़्त की हक़ीकत यह है कि मुसलमान, दलित, जनजाति व पिछडेवर्ग के लोग अच्छी तरह समझ चुके हैं कि बसपा का मतलब भाजपा की बी-टीम है, यानिकि भाजपा सपोर्टिंग पार्टी है। बसपा को वोट देना भाजपा को वोट देना है। मुस्लिम समाज को खुदगर्ज नेताओं के जज्बाती हिक्मत अमली को समझना होगा और सियासी सलाहियत पैदा करनी होगी। आज सभी समाज के लोग धर्म-सम्प्रदाय के बंधन से बाहर निकलकर समावेशी एकजुटता के साथ समाजवादी गठबंधन के प्रत्याशियों को वोट कर भाजपा को सत्ता से बेदखल करने की कोशिशों में लगे हैं तो खुदगर्ज नेता अपनी खुदगर्जी के चलते मुस्लिम समाज को गुमराह कर बसपा को वोट कराकर अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को मजबूती देने में लगे हैं। समाजवादी गठबंधन को सत्ता में आने से रोकने के लिए भाजपा और बसपा के बीच जो सौदेबाजी हुआ है उसका खुलासा भी हो गया है। ऐसे में एक तरफ 30 वर्षों के तपस्या की बात की जा रही है, दूसरी तरफ छुपे तौर पर उसका लाभ उस वर्चस्ववादी संगठन को देने की कोशिशें की जा रही है जो संविधान, लोकतंत्र, इंसानियत, भाईचारा, सामाजिक न्याय, दलित वर्ग, पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक वर्ग का घोर विरोधी है। इस हक़ीकत के बावजूद अगर कोई यह सोच रहा है कि मुस्लिम समाज भी भाजपा-बसपा की मिलीभगत को जानते हुए भी बहकावे में आकर जिंदा मक्खी निगल लेगा तो वह मुगालते में है। अपने निजी सियासी फायदे के लिए क़ौम को कहां ले जाने की कोशिश की जा रही है कभी सोचा है। निजी सियासी फायदे की सोच रखने वाले फ़ितरती लोग यह कभी सोच ही नहीं सकते। हाथी का पीलवान कौन है यह जगजाहिर हो चुका है। कोई बाज़ीगरी नहीं चलने वाली है। वक़्त के मौजूदा हालात के मद्देनजर देश, संविधान, लोकतंत्र, राष्ट्रीय सम्पदा-संस्थानों, किसानों, मजदूरों, नौजवानों, महिलाओं, व्यपारियों, दलितोंवर्ग, पिछडेवर्ग व अल्पसंख्यक समाज आदि के भविष्य की रक्षा के लिए समाजवादी पार्टी व समाजवादी गठबंधन के उम्मीदवारों को वोट देकर उत्तरप्रदेश में मा० अखिलेश यादव जी की समाजवादी सरकार बनवाना निहायत ही जरूरी है। संविधान व लोकतंत्र बचा रहेगा तभी चुनावी टिकट भी मिलेगा, लोग वोट भी करेंगे और नेतागण विधायक भी बनेंगे। इसे सियासी सलाहियत के साथ संजीदगी से समझने की जरूरत है।
इस दौरान पूर्व ब्लॉक प्रमुख लकी खान, मेहराब खान, शाहनवाज खान, खुशबुद्दीन अंसारी, इशमोहम्मद अंसारी, तूफानी अंसारी, मास्टर जाहिद अंसारी, वहीद अंसारी, रामदेव गुप्ता, सुशील कुमार वर्मा, आसिफ अंसारी, रसीद अंसारी, जमशेद आलम, मुजमिल अंसारी, सलमान अंसारी, रफीक अंसारी, पैगम्बर अंसारी, सोबराती अंसारी, अब्दुल मजीद शाह, सहादत अंसारी, हबीब अंसारी, आशीष मौर्या, रामायण मौर्या, राधेश्याम मौर्या, डॉ० मोहम्मद यूनुस आदि सैकड़ों लोग मौके पर मौजूद रहे।
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