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आरक्षण समाप्ति के सपने को पूरा करने हेतु भाजपा और संघ न्यायालय के शरण में – शमसुल होदा

न्यूज अड्डा डेस्क

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Feb 21, 2022  |  3:38 PM

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आरक्षण समाप्ति के सपने को पूरा करने हेतु भाजपा और संघ न्यायालय के शरण में – शमसुल होदा
  • पीरियोडिक/सामयिक समीक्षा के नाम पर पदोन्नति आरक्षण की समाप्ति के साथ साथ नियुक्ति आरक्षण को भी समाप्ति करने की चल रही साजिश।

कसया/कुशीनगर। कुशीनगर/विधानसभा फाजिलनगर (332) में सपा प्रत्याशी व पूर्व कैबिनेट मंत्री मा० स्वामी प्रसाद मौर्य को विजयी बनाने और उत्तरप्रदेश में मा० अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी गठबंधन की सरकार बनाने के लिए जनसम्पर्क अभियान में गांव-गांव दरवाजे-दरवाजे पहुंच कर समाजवादी संकल्पपत्र व सपा की नीतियों के प्रचार प्रसार में जुटे सपा जिला सचिव चौधरी शमसुल होदा ने कहा कि भाजपा और संघ आरक्षण समाप्ति के अपने सपने को न्यायालय के सहारे पूरा करने में लगी है। केवल पदोन्नति ही नहीं बल्कि नियुक्ति के आरक्षण को भी पीरियोडिक/सामयिक समीक्षा के नाम पर आरक्षण समाप्ति की साजिश की जा रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ेवर्ग को नियुक्ति व पदोन्नति में आरक्षण पाने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16(4) द्वारा मिला है। मा० सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक २८ जनवरी 2022 को केंद्र की भाजपा सरकार के अनुरोध पर आरक्षण की समीक्षा करने का आदेश दिया है।

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जिला सचिव चौधरी शमसुल होदा ने आगे कहा कि भाजपा और संघ भारतीय संविधान से आरक्षण व्यवस्था को ही समाप्ति करने में लग गये हैं। जिसकी शुरुआत मा० अटल बिहारी बाजपेयी के सरकार ने संविधान समीक्षा आयोग गठन करके हुई थी। परन्तु तत्कालीन राष्ट्रपति मा० के०आर० नारायण जी के प्रबल विरोध व राज्य सभा में भाजपा का बहुमत नहीं होने के कारण संघ व भाजपा के मंसूबे सफल नहीं हो सका था। संविधान समीक्षा के नाम पर अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ेवर्ग के आरक्षण को समाप्ति करना भाजपा व संघ का मुख्य एजेंडा है। परन्तु जब भाजपा सरकार जनाक्रोश व चुनाव के चलते आरक्षण व्यवस्था को समाप्ति करने में सफल नहीं हो सकी तब उसने न्यायालय का रास्ता चुना है। पदोन्नति आरक्षण के मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमे में केंद्र की भाजपा सरकार ने आरक्षण की पीरियोडिक/सामयिक समीक्षा की मांग कर ली और अनुसूचित जाति की पैरवी कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने भी केंद्र सरकार की हां में हां मिलाकर न्यायालय को गुमराह कर दिया। मा० सर्वोच्च न्यायालय ने पदोन्नति आरक्षण की पीरियोडिक समीक्षा (निश्चित समय अंतराल) के बाद पदोन्नति आरक्षण की समीक्षा करने का कानून बनाने का आदेश पारित कर दिया। ऐसे में भाजपा व संघ को आरक्षण व्यवस्था को समाप्ति करने का मौका मिल गया है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय उन्हीं क्षेत्रों में कानून बनाने का आदेश केंद्र सरकार को दे सकता है जहां व्यापक जनहित के प्रसंग हो और उस विषय पर कोई कानून संविधान में मौजूद न हो। नियुक्ति और पदोन्नति के आरक्षण के मामले में भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के रूप में अनुच्छेद 14, 15, 16, 16(4), 16(4क), 16(4ख) और अनुच्छेद 335 में स्पष्ट कानून मौजूद है।

जिला सचिव चौधरी शम्स ने आगे कहा कि पीरियोडिक/सामयिक समीक्षा केवल पदोन्नति आरक्षण की ही नहीं होगी बल्कि पूरी आरक्षण व्यवस्था की होगी। क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16(4) के अंतर्गत नियुक्तियों व पदोन्नति में आरक्षण का अधिकार एक ही अनुच्छेद से प्रदत्त है। यदि पदोन्नति के आरक्षण की समीक्षा का कानून बनता है तो पदोन्नति के साथ-साथ नियुक्तियों का आरक्षण भी संवैधानिक रूप से स्वतः उसके दायरे में आ जायेगा। पदोन्नति आरक्षण उत्तरप्रदेश, उत्तरांचल, हिमाचल प्रदेश, बिहार सहित अधिकांश राज्यों में पहले ही समाप्ति हो चुका है और जिन छोटे छोटे राज्यों में पदोन्नति का आरक्षण मिल भी रहा है वह कार्डर वाइज आंकड़ों की अनिवार्यता के चलते वेंटिलेटर पर पहुंच चुका है।

अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ेवर्ग के लोगों को यह समझना होगा कि वर्तमान में वर्चश्ववादी भाजपा सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में जो लड़ाई लड़ी जा रही है वह पदोन्नति आरक्षण के आड़ में नियुक्ति के आरक्षण को समाप्ति कराने की है। जिसमें भाजपा की केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की पूर्ण संलिप्तता है। जिसका पुख्ता सबूत यह है कि मा० सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उत्तरप्रदेश व उत्तरांचल राज्यों की भाजपा सरकारों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष नहीं रखा। जिसके चलते केंद्र की भाजपा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष जो मुद्दे तय करने के लिए रखे उसी पर सर्वोच्च न्यायालय ने मोहर लगा दी।हालांकि केंद्र की भाजपा सरकार ने निजीकरण कर आरक्षण व्यवस्था को लगभग समाप्ति कर ही चुकी है। मान्यवर कांशीराम जी ने कहा था कि जब वंचित समाज में जागृति आनी शुरू होगी तब सत्ता के सभी स्तम्भ, कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया एकजुट होकर वंचित समाज के दमन में लग जायेंगे। भाजपा सरकारें वर्तमान में देश, संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, साम्प्रदायिक सौहार्द, मानवता, भाईचारा आदि के लिए खतरा बन चुकी हैं। ऐसे में भाजपा सरकारों को सत्ता से बेदखल करने की जिम्मेदारी अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ेवर्ग व अल्पसंख्यकवर्ग की है। समावेशी एकजुटता के साथ समाजवादी पार्टी व समाजवादी गठबंधन के प्रत्याशियों को वोट देकर ही वर्चश्ववादी भाजपा को सत्ता से बेदखल किया जा सकता है। चुनाव में एक एक वोट का महत्व होता है। भाजपा विरोधी वोटों में बंटवारा ही भाजपा को लाभ देता है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ेवर्ग व अल्पसंख्यकवर्ग के लोगों को इस वास्तविकता को समझते हुए भाजपा के हिन्दू बनाम मुसलमान मकड़जाल से बाहर निकलना होगा, जाति-सम्प्रदाय के नामपर वोटों के बंटवारे को रोकना होगा, तथा समावेशी एकजुटता के साथ भाजपा की मुख्य विपक्षी समाजवादी गठबंधन के प्रत्याशियों को अपना वोट देकर उत्तरप्रदेश में मा० अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी गठबंधन की सरकार बनाने हेतु संकल्पित प्रयास करना होगा।

इस दौरान पूर्व ब्लॉक प्रमुख व सपा नेता लकी खान, सपा नेता कलामुद्दीन, सपा नेता तुफैल अहमद, मेहराब खान, शाहनवाज़ खान, प्रधान जय प्रकाश यादव, प्रधान संजय यादव, पूर्वप्रधान हरेंद्र यादव, प्रधान नबीरसूल अंसारी, प्रधान नूरुल होदा अंसारी, जिला पंचायत सदस्य अख्तर अंसारी, प्रधान सद्दाम हुसैन, प्रधान अकबर अंसारी, सुभाष प्रसाद मौर्य, पूर्वप्रधान फौजदार प्रसाद, पूर्वप्रधान कमरुल होदा, पूर्वप्रधान सुभाष यादव, पूर्वप्रधान जुमराती, रामायन आर्य, शेख मोबीन, मास्टर मुर्तुजा हुसैन, ढूनमून प्रसाद, डॉ० जहीरुद्दीन, डॉ० मुख्तार अहमद, शेख मैनुद्दीन आदि सैकड़ों सपा नेतागण, पदाधिकारीगण व समर्थकगण मौजूद रहे।

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