जौरा बाजार/कुशीनगर। प्रभु का नाम जपने मात्र से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। कलयुग में प्रभु नाम की महिमा अधिक है। नारद जी, बाल्मिकी, भक्त ध्रुव व प्रह्लाद आदि तो भगवान का नाम जपकर ही प्रभु को प्राप्त कर लिए। पथभ्रष्ट हो चुका अजामिल भी नारायण नाम जपकर भगवान के धाम को प्राप्त कर लिया था
यह बातें कथा ब्यास श्री सत्येंद्र पाठक महाराज ने ग्राम — कोटवा (करजहि) श्रीभागवत कथा में शुक्रवार के दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए कही। व्यास जी ने कहा कि राजा परीक्षित द्वारा प्रश्न करने पर सुखदेवजी कहते हैं कि जीवों द्वारा किए गए कर्म रूप में फल का विधान किया गया है। सदा ध्यान रखना चाहिए कि मेरे द्वारा पाप नही हो अन्यथा नर्क में जाना पड़ता है। नर्क से बचने का एकमात्र उपाय प्रभु नाम का जाप है। अजामिल चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि वह एक वेदपाठी ब्राह्मण था। एकबार एक शुद्र को वेश्यागामी होते देखा तो उनका भी मन बिगड़ गया। वे उसी वेश्या को प्रसन्न करने में लग गए। वे लगातार पाप में रत होते चले गए। एक बार जब संत उसके घर आए और भोजन किया तो उन्हें एहसास हुआ की वह बड़ा पापी है। संत ने उन्हें सही रास्ते पर लाने के लिए कहा कि आज से भगवान का भजन शुरू कर दें तो अजामिल ने इंकार कर दिया। संतों ने उसके पुत्र का नाम नारायण रख दिया। अजामिल पुत्र के कारण नारायण नारायण उच्चारण करने लगा और भगवान के धाम को प्राप्त किया। कथा के बीच बीच में प्रसंग से जुड़े भजन को वाराणसी के पंडित राहुल पाठक बेदाचार्य जी एवं सत्यदेव मिश्रा ने गाया।
उपस्थित क्षेत्र के श्रद्धालुओ में डॉ0 मस्तराज सिंह ,मार्कण्डेय सिंह ,नंदकिशोर कुशवाहा ,रीना देवी , प्रभावती देवी ,पिंकी सिंह ,अमरजीत कुशवाहा ,दयानन्द दुबे ,हीरालाल शर्मा ,अच्च्यवर रे ,हरि गुप्ता ,उमेश राय , राजेन्द्र पाण्डेय ,प्रमोद गुप्ता ,आदि रहे।
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