कसया/कुशीनगर। रंग- मंच, ललित कलाओं एवं साहित्य को समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती इकाई कुशीनगर के तत्वावधान में उपाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव के आवास पर नाट्यशास्त्र के प्रणेता भरत मुनि एवं संत कवि भक्त रविदास की जयन्ती श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया।
कार्यक्रम का प्रारम्भ अतिथियों द्वारा भरत मुनि एवं सन्त रविदास के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।मुख्यवक्ता विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख सुरेश प्रसाद गुप्त ने कहा कि कलाओं के अग्रदूत भरत मुनि नाट्यशास्त्र के प्रणेता हैं। इस नाट्यशास्त्र में 36 अध्यायों में समाहित 6000 श्लोक हैं| नाट्यशास्त्र को पंचम वेद भी कहा गया है। कहा कि सर्वप्रथम भरतमुनि ने नारद और स्वाति ऋषि की सहायता से नाटक का निर्माण कर अपने 100 पुत्रों से अभिनय कराकर राजा नहुष के राज्य में प्रस्तुत किया।
श्री गुप्त ने सन्त रविदास की चर्चा करते हुए कहा कि सन्त रविदास का जन्म वाराणसी में हुआ था। ये कबीर के समकालीन रामानन्द के शिष्य एवं मीरा बाई के आध्यात्मिक गुरु थे। मुख्य अतिथि अवकाश प्राप्त न्यायधीश सन्तोष श्रीवास्तव ने कहा कि भरतमुनि द्वारा समस्त कलाओं, नाटक, साहित्य, भाषा, छंद, वास्तु, मनोविज्ञान, संगीत, नृत्य, कला, चित्रकला, गायन – वादन सभीपर सुक्ष्म विवेचन किया गया है। कहा कि रैदास अलमस्त फक्कड़ थे। लोक परलोक, निन्दा स्तुति से परे थे। अध्यक्षता आलोक कुमार श्रीवास्तव व संचालन राजू मद्धेशिया एवं आभार अशोक जैन ने की। इस दौरान दिनेश तिवारी भोजपुरिया, डॉ. अम्बरीष विश्वकर्मा, रमेश मधेशिया रामाशीष राय, त्रिभुवन तिवारी आदि उपस्थित रहे। गीत एवं वन्दे मातरम् का सामूहिक गान हुआ।
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