खड्डा/कुशीनगर। भारतीय संविधान अद्भुत एवं अद्वितीय है, यह विश्व का सबसे बड़ा एवं लिखित संविधान है, उक्त बातें संविधान दिवस के अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय इण्टरमीडिएट कालेज भुजौली के प्रधानाचार्य डा.देवेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कही।
संविधान दिवस पर राष्ट्रीय इण्टरमीडिएट कालेज में विविध कार्यक्रम आयोजित हुए। संविधान की विशेषता बताते हुए प्रधानाचार्य डा. देवेन्द्र मणि ने बताया कि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसे आज के ही दिन 26 नवम्बर 1949 को अंगीकार किया गया था।26 नवम्बर 2015 से प्रत्येक वर्ष आज ही के दिन पूरे देश में संविधान दिवस मनाया जाता है, मूल संविधान 16 इंच मोटा तथा 22 इंच लम्बा है, इसमें कुल 251 पृष्ठ हैं। यह अंग्रेजी और हिन्दी में है तथा हस्तलिखित है, इसे प्रेमविहारी नारायण रायजादा ने स्वयं अपने हाथ से लिपिबद्ध किया है। मूल संविधान में 22 भाग, 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूची है। इसे बनाने में 2 वर्ष 11 माह एवं 18 दिन का समय लगा था। भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को देश में लागू किया गया। इसके पूर्व संविधान की प्रस्तावना का शपथ छात्र- छात्राओं को प्रधानाचार्य द्वारा दिलाई गयी।
इस अवसर पर गिरिजेश मल्ल, अभिषेक पान्डेय, संजय पान्डेय, निर्भय मिश्र, सत्येन्द्र मिश्र, उत्तम प्रजापति, दीपिका सिंह, शिल्पा प्रजापति, रामस्वरूप पान्डेय, कमलेश शर्मा, अजय सिंह, देवेन्द्र कुशवाहा, मनीष राय, आशीष सिंह सहित सभी अध्यापक कर्मचारी उपस्थित रहे।
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