खड्डा/कुशीनगर। पहाड़ी सहित मैदानी इलाकों में पिछले तीन दिनों से हो रही भारी बारिश से लोगों की दिनचर्या अस्त- ब्यस्त हो गई है। लोग घरों में कैद हो गये हैं। वहीं नदी पार बसे गांव के लोगों को एक बार फिर बाढ़ की चिंता सताने लगी है। भारी बारिश के साथ तेज हवा किसानों पर आफत की बरसात हो गई है। खेतों में खड़ी अगेती धान की फसल जमींदोज हो गए हैं। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के कारण बाल्मीकि गंडक बैराज से नदी में 3 लाख 80 हजार 4 सौ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जिससे नदी तट के किनारे बसे लोगों को एकबार फिर बाढ़ के ख़तरों का डर सताने लगा है।
खड्डा इलाके में बीते तीन दिनों से लगातार बारिश के कारण लोगों का जीवन चर्या अस्त- ब्यस्त हो गया है। सड़कों सहित गली मुहल्लों में पानी भर गया है। वहीं बारीश के साथ तेज हवा ने किसानों के खेतों में खड़ी गन्ने, केला व धान की फसलों की सूरत बिगाड़ दी है। अक्टूबर महिने में भारी बारिश ने जहां तिलहन की खेती को प्रभावित कर दिया है वहीं धान की अगेती खेती जो पक कर तैयार थी वह जमींदोज हो गईं हैं। केले व गन्ने की फसल भी बारिश से काफी बर्वाद हो गई है। उधर गण्डक एक बार उफनाते हुए नदी पार बसे शिवपुर, बसंतपुर, हरिहरपुर, नारायनपुर, मरचहवा, बालगोविंद छपरा, शाहपुर, बकुलादह, महादेव व सालिकपुर में बाढ़ के रूप में तबाही मचाने को आतुर दिख रही है। पहाड़ी व मैदानी इलाकों के जल अधिग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश की वजह से बाल्मीकि गंडक बैराज से नदी में गुरुवार को सुबह 8 बजे 2 लाख 80 हजार क्यूसेक, 11 बजे 2 लाख 97 हजार क्यूसेक तो 3 बजे डिस्चार्ज लगातार बढ़ते हुए 3 लाख 4 क्यूसेक तो रात्रि 8 बजे 3 लाख 80 हजार 400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जिससे इन गांवों में देर रात बाढ़ का पानी गांवों में घुसने की प्रवल संभावना बनी हुई है। फिलहाल अक्टूबर महिने में लगातार बारिश का पानी किसानों पर मुसीबत का कहर बनकर गिर रही है लोग घरों में कैद हैं। अभी भी बारिश का सिलसिला दिन- रात लगातार जारी है।
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