कसया/कुशीनगर । तहसील कसया अंतर्गत फाजिलनगर क्षेत्र के मधुरिया गांव में गौ सेवा की तेरहवीं की अनूठी मिसाल देखने को मिली 12 दिन पहले गाय की मौत पर हिंदू रीति-रिवाज से किया गया था, अंतिम संस्कार, तेरहवीं पर गायत्री पूजन,हवन के साथ हुआ ब्रह्मभोज ।
इंसान और पशुओं के प्रेम के बीच की कल्पना कर पाना नामुमकिन है। इंसान और गौ माता के बीच की एक ऐसी ही अनूठी और समाज को प्रेरणा देने वाली खबर है। जिसे पढ़ कर लोग अभिभूत हो सकते हैं। दर असल फाजिलनगर के मधुरिया गांव में रहने वाले किसान नेता समाजसेवी शियाशरण उर्फ सप्पू पाण्डेय के यहा करीब 10 सालों से पली एक गाय का निधन बारह दिनों पहले हो गया था।जिसके बाद शनिवार को परिवार वालों ने गाय की आत्मशांति के लिए विधि-विधान से त्रयोदशी (तेरहवीं) संस्कार कराया। जिसमें न केवल परिवार के लोग शामिल हुए, बल्कि ग्रामीणों ने भोजन कर इस काम को सच्ची गौ सेवा का जीता जागता उदाहरण भी बताया।मधुरिया गांव के रहने वाले पाण्डेय के परिवार ने एक गाय रामजनकी मठ कसया से लाई थी । उस गाय को परिवार के लोगो ने अपनी बेटी की तरह पाला। उसकी सेवा की। अचानक 1नवंबर के दिन संतोषी नाम की गाय का निधन हो गया। तब परिवार के सदस्यों ने उसके अंतिम विदाई वैदिक रीति-रिवाजों के साथ की। जिसमें गांव के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए थे।
पाण्डेय ने बताया की गौ माता की सेवा अपनी मां की सेवा की तरह ही की थी। मेरा कर्तव्य था कि मैं उसका अंतिम संस्कार और त्रयोदशी का कार्यक्रम हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार करू। मुझसे जैसी सेवा बनी वह मैंने की है।गो माता का आशीर्वाद भी मुझको भरपूर मिला है।
उन्होंने ने कहा कि गाय बहुत ही पूजनीय है। अगर गाय प्रसन्न होगी, तो हमारी खुशहाली होगी। इसलिए गाय की सेवा करनी चाहिए। जिससे दोनों लोक में मनुष्य का कल्याण होता है
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