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30 कार्यदिवस में इंसाफ, नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या के दोषी को फांसी विवेचक की तेज़ व वैज्ञानिक जांच बनी केस की रीढ़

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Mar 25, 2026  |  9:59 PM

745 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
30 कार्यदिवस में इंसाफ, नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या के दोषी को फांसी विवेचक की तेज़ व वैज्ञानिक जांच बनी केस की रीढ़

कुशीनगर । जटहां बाजार थाना क्षेत्र में नाबालिग के साथ दुष्कर्म व हत्या के जघन्य मामले में न्यायालय ने महज 30 कार्यदिवस के भीतर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। इस पूरे प्रकरण में विवेचक की तेज, सटीक और वैज्ञानिक जांच ने केस को निर्णायक मोड़ दिया, जिसके चलते इतनी कम अवधि में दोष सिद्ध हो सका।

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पुलिस के अनुसार, 23 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर संख्या 020/2026 में वादिनी ने अपने पुत्र अंकुश के लापता होने की सूचना दी थी। 23 फरवरी को ही खैरा माई स्थान के पास बालक का शव बरामद हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1), 238(A) व पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

बताते चलें कि मामले की विवेचना संभालते हुए उपनिरीक्षक आलोक यादव ने घटनास्थल से साक्ष्य संकलन से लेकर तकनीकी विश्लेषण तक हर बिंदु पर तेजी दिखाई। उनकी रणनीति के तहत पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर 25 फरवरी 2026 को आरोपी पिन्टू उर्फ कोयल को गिरफ्तार कर लिया।

विवेचक आलोक यादव ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए डिजिटल साक्ष्यों को e-Sakshya ऐप पर सुरक्षित कराया। साथ ही फोरेंसिक लैब से डीएनए रिपोर्ट प्राथमिकता पर प्राप्त कराई, जिसने केस को मजबूत आधार दिया। समयबद्ध तरीके से साक्ष्य जुटाने और उन्हें विधिक रूप से प्रस्तुत करने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। विवेचक की सक्रियता का ही परिणाम रहा कि महज 9 कार्यदिवस में 7 मार्च 2026 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया। इसके बाद न्यायालय में सुनवाई भी तेजी से आगे बढ़ी। सुनवाई के दौरान विवेचक ने अभियोजन के साथ समन्वय बनाते हुए सभी गवाहों को समय पर न्यायालय में प्रस्तुत कराया, जिससे ट्रायल बिना किसी देरी के पूरा हो सका।

अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट, कुशीनगर ने 25 मार्च 2026 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए मृत्यु दंड (फांसी) और 3,25,000 रुपये के आर्थिक दंड से दंडित किया। विवेचक की भूमिका बनी सफलता की कुंजी। इस पूरे मामले में उपनिरीक्षक आलोक यादव की त्वरित, वैज्ञानिक और सशक्त विवेचना ही केस की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। उनके साथ एडीजीसी क्रिमिनल जीपी यादव, एसपीपी सुनील मिश्रा, संजय कुमार तिवारी, थानाध्यक्ष अभिनव मिश्रा व पैरोकार सोनू कुमार ने भी प्रभावी भूमिका निभाई।
तेज न्याय, कड़ा संदेश
महज 30 कार्यदिवस में जांच से सजा तक की प्रक्रिया पूरी होना न केवल पुलिस की कार्यकुशलता को दर्शाता है, बल्कि यह समाज में अपराधियों के लिए कड़ा संदेश भी है कि ऐसे जघन्य अपराधों में अब त्वरित और सख्त सजा तय है।

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