कसया/कुशीनगर। अभी हाल ही में नगर विकास मंत्री एके शर्मा को बुद्धा घाट व रिवर फ्रंट की सुंदरता दिखाकर नगरपालिका परिषद कुशीनगर ने उनकी शाबाशी बटोर ली लेकिन इसके उलट देखा जाय तो ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। इस नगर पालिका में शामिल हुए 41 गांवों की हालत बद से बदतर है। शहरी विकास के नाम पर करोड़ों डकार जाने के बावजूद इन गांवों में जगह – जगह गंदगी का साम्राज्य है और जल निकास, पथ प्रकाश, पेयजल का अभाव है तो सड़कों की हालत खास्ता है।
बता दें कि नगरपंचायत कुशीनगर को नव सृजित नगरपालिका कुशीनगर की घोषणा राज्य सरकार द्वारा हो जाने के बाद नगरपालिका में कसया ब्लाक के 41 गांवों को जब शामिल कर लिया गया तो आशा जगी थी कि इन गांवों का काया कल्प होगा और शहरी सुविधाएं मिलेंगी। वर्तमान नगरपालिका परिषद कुशीनगर की वतर्मान अध्यक्ष साबिरा खातून के पांच वर्ष पूरे होने को है लेकिन अगर आप इन गांवों में जाएंगे तो पाएंगे कि इनकी हालत ग्राम पंचायतों से भी बदतर है। नगर से सटे वार्ड पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर, वीर सावरकर नगर, महन्तथ अवैद्यनाथ नगर, संत गाडगे नगर, संत गणिनाथ नगर, शाहीद भगत सिंह नगर, छत्रपति शिवाजी नगर, विवेकानन्द नगर सहित विभिन्न वार्डों में शामिल गांवों में जल निकासी की पोल बारिस में खुल जाती है। वार्डों में सफाई कर्मियों की फौज होने के बाद भी यत्र – तत्र गन्दगी का अंबार लगा रहता है। इसका जीता जागता नमूना पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर मथौली में देखा जा सकता है। वहीं अनिरुद्धवा में जल निकासी की समस्या से लोग परेशान हैं।वार्ड न.4अम्बेडकर नगर भरौली में सपहा मार्ग से प्रवेश करने पर टूटी -फूटी सड़क की दुर्दशा साफ दिखती है l नगरपालिका कार्यालय से सटे वार्ड न.24 सुबाष नगर में निरंकारी गली से हाइबे फोर लेंन में मिलने वाली मार्ग व नालियों की काफ़ी बुरी दुर्दशा है l यह मार्ग नगर पंचायत से नगरपालिका में सृजन होने के समय से ही टूटी -फूटी गड्ढामय सड़क नगरपालिका के विकास की व्यथा बता रहीं है, तों वही नालियों की सड़न व बदबू के कारण इधर से गुजरना मुश्किल है l
अभी हाल ही में भाजपा नेता ओमप्रकाश जायसवाल ने नगर विकास मंत्री को पत्र देकर इस समस्या के समाधान की मांग की है।तों मनोनीत सभासद व पूर्व जिला पंचायत सदस्य ओमप्रकाश वर्मा ने भी साफ -सफाई तथा नगरपालिका के द्वारा जमींनी स्तर पर विकास कार्यों पर सवालिया निशान खड़ा किया है l हर घर नल योजना के तहत अभी घरों में नल देने की योजना पूरी नही होने से लोग पेयजल को लेकर परेशान रहते हैं। वार्डों की सड़कों व संपर्क मार्गों की हालत भी खास्ता है। इनमें जो निर्माण कराए गए हैं उस बारे में लोगों का कहना है कि घटिया निर्माण कराए जाने से नालियां व सड़कें टूट रही हैं। इस सबन्ध में नगर वासियों के कहना है कि नगरपालिका में विकास के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है और इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक डेवलपमेंट, सोसल डेवलपमेंट, ग्रीन एंड क्लीन, रिवर डेवलपमेंट, सोसल एक्टिवेशन, योजनाओं के नाम पर अरबों खर्च किये गए लेकिन नगरपालिका में विकास केवल और केवल दिखावा है। इनमें खर्च धन का बंदरबांट हुआ है और विकास के नाम पर जनता के साथ धोखा किया गया है। नगर वासियों ने पूरे पांच साल में हर तरह की योजनाओं व प्रस्तावों में कराए गए कार्यों के जांच की मांग जन प्रतिनिधियों व आला अधिकारियों से की है। कहना न होगा कि अगर पारदर्शिता और निष्पक्षता की बात कही जाती है तो अपने किये वादों पर सरकार, जनप्रतिनिधि व अधिकारी कितना खरा उतरते हैं यह यक्ष प्रश्न है जबकि सच्चाई सबके सामने है।
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