कसया/कुशीनगर । संत निरंकारी सत्संग भवन गोपालगढ़,कसया पर विशाल रूप में निरंकारी संत समागम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाँदा ज़ोन के जोनल इंचार्ज महात्मा डॉ. दर्शन सिंह जी ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि- हम सभी आज बहुत ही भाग्यशाली है कि आज इकट्ठे होकर प्रभु परमात्मा की चर्चा और गुणगान कर रहे है। आज इस परमात्मा को पाना काफी सरल है। गोस्वामी जी कहते है निर्मल मन मोहे पावा। यह सत्संग भी एक निर्मल गंगा है। यहाँ किसी की जाति, धर्म नही बदला जाता। बदलते है सिर्फ व्यक्ति के विचार और मन । जब मनुष्य जान जाता है कि उसका जन्म किस उद्देश्य के लिए हुआ है? सत्य क्या है? और जब जान लेता है कि यह प्रभु परमात्मा निरंकार ही सत्य है और इसकी जानकारी ब्रह्मज्ञान के द्वारा मनुष्य को मिलती है। निरंकारी मिशन इसी सत्य प्रभु परमात्मा की जानकारी कराता है।
हम सभी को ब्रह्मज्ञान देकर इस निर्गुण निराकार की लखता करके अपना लोक सुखी और परलोक सुहैला कर रहे है। ब्रह्मज्ञान लेने के बाद हम सभी को एक नये शब्द महात्मा से सम्बोधित किया जाता है। महात्मा का अर्थ यही होता है कि इस महान ईश्वर के साथ हमारी आत्मा का सम्बंध जुड़ जाता है तब सब हमे महात्मा जी , सन्त जी , महापुरुषों जी आदि नामो से सम्बोधित किया करते है। ब्रह्मज्ञान लेने के बाद निरन्तर सत्संग ,सेवा, सुमिरन करने से हमारी आत्मा का जुड़ाव परमात्मा से अधिक होने लगता है अर्थात हम परमात्मामय, ईश्वरमय हो जाते है। हमारे विचारों में परिवर्तन होता है और जब हमारे विचार सात्विक होंगे तो हमारे कर्म भी प्रभु परमात्मा को जो पसन्द होगा उसी अनुसार होगा। आज हम सभी धन्य है इस धरा धाम पर समय की सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के सानिध्य में रूहानियत और इंसानियत वाले गुणों को अपनाकर समाज के उत्थान में भरपूर योगदान दे रहे है। आज सन्त निरंकारी मिशन देश के विभिन्न क्षेत्रों / स्थानों पर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण के साथ साथ ही कोरोना काल मे हर प्रकार की सेवा बढ़ चढ़ कर रहा है। जिससे समाज मे समरसता की भावना, एक-दूसरे से प्रेम की भावना, सत्कार की भावना का उद्भव हो रहा है। महात्मा बुद्ध की इस परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना अंतिम उपदेश भी दिया कि मनुष्य को अपने आप को जानने के लिए परमात्मा के साथ स्थिर मन के साथ जुड़ाव होना जरूरी है। तभी व्यक्ति का कल्याण होगा। जब इस निराकार परमात्मा के साथ हमारा सम्पर्क हो जाता है तब इससे हमारी मनोस्थिति हर पल , हर क्षण इसी प्रभु परमात्मा की गुणगान करती है। आज निरंकारी मिशन वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को कायम कर रहा है, जिसका उदाहरण यहाँ उपस्थित यह विशाल मानव परिवार है। सभी के जीवन सतगुरु की सिखलाई शामिल है।सभी का जीवन धन्य हो गया है। अब इसे निरन्तर सेवा, सत्संग और सुमिरन के द्वारा और मजबूती मिलेगी।अंत में जोन-62 कुशीनगर के जोनल इंचार्ज कमलेश मणि त्रिपाठी ने संत समागम में आये हुए अतिथियों, सन्तों, श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट किया। सभी आगन्तुकों के लिए लंगर प्रसाद की व्यवस्था थी। कार्यक्रम का संचालन राकेश मणि ने किया।
इस अवसर पर सतीश दुबे, ज्ञानेन्द्र, ज्ञानेश, रघुनंदन, संजय सिंह, अनिल राय ,श्याम,उदय प्रताप,हीरालाल,तारकेश्वर, राजकुमार, सुधीर,राजमन,दीनदयाल, गोविंद, रवि ,रामबली, प्यारेलाल,विनोद, टंडन,बाबूलाल,अभिषेक, राजू,आदित्य,गायत्री,अंगद, बिंदु, राजकली, रीता, किरण, पूनम आदि हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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