कुशीनगर। पिछले तीन दशक से हर वर्ग के सामाजिक उत्थान को लेकर प्रयासरत हृदयानन्द शर्मा कुशीनगर के बटेसरा नामक गांव में रहते है पेशे से पत्रकार और पैदाइशी किसान है। इनसे मुलाकात लगभग 12 वर्ष पहले अयोध्या में मरहूम असग़र अली इंजीनियर साहब की एक अयोध्या में आयोजित कार्यशाला में हुई थी जिसमें मैं एक रिसोर्स पर्सन की हैसियत से शामिल था।
कार्यक्रम का आयोजन मैगसेस अवार्ड प्राप्त संदीप पांडे जी के नेतृत्व में युगल किशोर शास्त्री ने किया था। आज शर्मा जी हमारे सद्भावना परिवार का न केवल अभिन्न हिस्सा हैं बल्कि टीम के अन्य सदस्यों में सामंजस्य बनाये रखने की अटूट कड़ी भी हैं। मेरा सेशन खत्म होने के बाद इंजीनियर साहब ने एक नौजवान की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये जनाब बुद्ध की धरती से आये हुए शर्मा जी है। इनमें बड़ी सूझबूझ है और इनके पास बुद्ध की तरह सवाल बहुत हैं। बात आई गई हो गई, पर शर्मा जी की उत्सुकता और साझी विरासत तथा लोकतंत्र की समझ हम पर असर कर गई। सम्पर्क बढ़ता गया तब पता चला कि इनका संघर्ष और जुझारूपन तो महात्मा बुद्ध कॉरिडोर की लड़ाई लड़ते हुए पहले से ही स्थापित है। धर्मनिरपेक्ष और प्रजातांत्रिक मूल्यों का समाज बनाने में अनवरत सक्रिय होने के साथ साथ साझी विरासत के बड़े प्रवक्ता भी साबित हुए है। एक ईमानदार पत्रकार के रूप में इन्होंने कमजोर वर्गों की आवाज़ को दूर तक पहुंचाया है और उनकी दुश्वारियों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई है।देश के तमाम बड़े संगठनों यथा आल इंडिया सेक्युलर फोरम,भारतीय सामाजिक संस्थान, एनएपीएम, आशा,सेंटर फॉर हार्मोनी एंड पीस और इंसाफ सहित दर्जनों संगठनों के साथ मिलकर मुल्क में अमन चैन स्थापित करने का इनका प्रयास सर्वविदित है। स्कूली बच्चों में सर्व धर्म समभाव, गांधी मूल्य, आज़ादी के आंदोलन की विरासत, बहुलतावाद और संवैधानिक मूल्यों को कैसे पहुंचाया जाए इसके लिए कुशीनगर, देवरिया और आसपास के जनपदों के स्कूलों में जागरूकता अभियान का भी नेतृत्व अपने शास्वत साथी संजय सिंह के साथ मिलकर कर रहे हैं। इंजीनियर साहब की पारखी दृष्टि सच साबित हुई। वर्तमान में बड़े अखबारों, पत्र – पत्रिकाओं में अपनी लेखनी की बेजोड़ छाप छोड़ रहे हैं तो आम जन मानस को वैधानिक सुविधाओं के लिए सरकारी या गैर सरकारी तौर पर प्रयास कर रहे हैं। पिछले दो दशक से बुद्ध स्थली कुशीनगर में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष रत किसानों की भूमि बचाओ संघर्ष समिति को अनवरत सहयोग कर रहे हैं।
साथ ही जनपद कुशीनगर में पत्रकारों के एक संगठन (अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति) का बतौर जिलाध्यक्ष नेतृत्व भी कर रहे हैं। मुझे गर्व है कि हमें इनका साथ मिला है और इन्हें अधिक गतिशील बनाने में भूमिका निभा सका। आज ये हमारी टीम का मजबूत, अटूट और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जिनके कांधे पर समतामूलक समाज निर्माण की जिम्मेदारी है। उम्मीद करते है कि समतामूलक समाज बनाने का इनका सपना अवश्य पूरा होगा।
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