कुशीनगर। तथागत इस बात के प्रमाण हैं की भारत की सभ्यता लगभग 2600 वर्ष पुराना है। महाभारत का कालखंड हमें यह बताता है कि देश का इतिहास 5000 से अधिक पुराना है। प्राचीन भारत ज्ञान, विज्ञान, तकनीकी और समृद्धि के मामले में विश्व का सिरमौर था।सन 1757 में प्लासी के युद्ध में भारत के भाग्य का निर्माण होने जा रहा था लेकिन लोगो में राष्ट्र भक्ति की कमी और मीर जाफ़र की गद्दारी से भारत अंग्रेजों का गुलाम बन गया। सन 1857 में राष्ट्र की आत्मा जगी और देश ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया लेकिन कुछ लोगो ने इसे विद्रोह कहकर इसका महत्त्व कम करने की कोशिश की।यह बातें राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ कुशीनगर जनपद द्वारा ‘स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव एवं राष्ट्र निर्माण’ विषयक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि महेंद्र कुमार ने बोलते हुए कही।आपने बताया कि देश को आजादी बहुत संघर्षो व बलिदान के बाद मिली है। राष्ट्र के रूप में आज़ाद भारत ने बहुत तरक्की की है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि आजादी और तरक्की के 75 वे वर्ष में स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को भूलना नहीं चाहिए।अपनी संस्कृति और भाषा का रक्षण किये बिना हम भारतीयता को सुरक्षित नहीं रख सकते। भारतीयता का रक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।आपने सभी आग्रह किया की भारत को भारत बनाया जाये न की इंडिया।
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता बुद्ध स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के गणित विभागाध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर सिंह ने की।इस अवसर पर लोगो को सम्बोधित करते हुए राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलायी। आपने सभी से आह्वान करते हुए कहाकि हमें भारत का पुनरनिर्माण भारतीयता के मॉडल पर करना होगा।डॉ गौरव तिवारी ने इस अवसर पर बोलते हुए कहाकि आजादी का अमृत महोत्सव उल्लास व आनंद का विषय होने के साथ ही चिंतन का भी विषय है। आपने बताया कि आजादी के 75 वर्ष में देश के राष्ट्रध्यक्ष के रूप में एक आदिवासी महिला को चुनना निश्चित रूप से हमारे लोकतंत्र के परिपक्व होने का प्रमाण है।विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाये रखना हमारी बड़ी उपलब्धि और जिम्मेदारी है।इस अवसर आपने अपनी भाषा और संस्कृति को बचाये रखने का आह्वान किया। आपने बताया कि भावनाओं के अनुवाद नहीं होते अपितु शब्दों के अनुवाद होते हैं। हमें अपने धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता की भी रक्षा करनी होगी।
इस अवसर पर बोलते हुए डायट प्राचार्य श्री अमित सिंह ने कहाकि अगर हम यह तय कर ले कि कहा जाना और हमारे साधन क्या है तो मार्ग की यात्रा सुगम हो जाती है। यही बात राष्ट्र के लक्ष्य के सन्दर्भ में भी लागू होती है।इस अवसर पर उपस्थित समूह को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के मण्डल अध्यक्ष श्री राजेश कुमार शुक्ल ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों का स्वागत अमृत महोत्सव कार्यक्रम (प्राथमिक संवर्ग )के जिला संयोजक श्री हरिश्चंद्र मिश्र ने किया। कार्यक्रम का संचालन श्री पयोदकांत मिश्र ने किया।इस गोष्ठी में प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष श्री अविनाश मिश्र, अभाविप के जिला प्रमुख डॉ निगम मौर्य,राजेश तिवारी, श्रीधर पाण्डेय, संजय यादव, संध्या मौर्या, अंजली राय, नम्रता टंडन,क्षमा सिंह,नासरीन, दीपमाला,रेनू राय आदि के साथ बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
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