कसया/कुशीनगर। लोकरंग आयोजन के समय, लोकरंग पत्रिका या किताब जारी की जाती है। अब तक लोकरंग की 4 पुस्तकें, लोकरंग-1, 2, 3 और अब 4 प्रकाशित हुई हैं। इनमें लोकसंस्कृतियों के विविध पक्ष शामिल हुए। इन संग्रहों में बहुत कुछ पहलीबार सामने आया। जैसे रसूल मियां की खोज 2008 में। चंद्रशेखर की पीएचडी, विदेशिया लोक संस्कृति का प्रकाशन। जारी गीतों का संग्रह। बहुत सी लोकगाथाओं के बारे में। बाल गीतों का विशाल संग्रह। भोजपुरी लोक गीतों के अलावा, बंगाल, दक्षिण भारत, उड़ीसा, राजस्थान आदि की संस्कृतियों को शामिल किया गया। वंचितों समुदाय के लोकगीतों में उनकी पीड़ा का अध्ययन किया गया। इन संग्रहों के अलावा 10 पत्रिकाओं का भी सम्पादन किया गया है जो शोधकर्ताओं के लिए काम की रही हैं। इनकी मांग हमेशा बनी रहती है।
लोकरंग-4 का लोकार्पण 14 अप्रैल को देश के महत्वपूर्ण साहित्यकारों के बीच होगा। अगोरा प्रकाशन इसे अमेज़ॉन के माध्यम से उपलब्ध कराएगा।
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