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हाईवे पर भ्रष्टाचार की काली परछाई गोरखपुर परियोजना निदेशक पर गंभीर आरोप, कुशीनगर–बिहार सीमा तक अवैध कटों से बढ़ा मौत का खतरा उच्चस्तरीय जांच की मांग, जल्द सौंपा जाएगा ज्ञापन

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Feb 24, 2026  |  3:46 PM

939 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
हाईवे पर भ्रष्टाचार की काली परछाई गोरखपुर परियोजना निदेशक पर गंभीर आरोप, कुशीनगर–बिहार सीमा तक अवैध कटों से बढ़ा मौत का खतरा उच्चस्तरीय जांच की मांग, जल्द सौंपा जाएगा ज्ञापन WhatsApp
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कुशीनगर। गोरखपुर परियोजना निदेशक कार्यालय के परियोजना निदेशक पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचते नजर आ रहे हैं। नेशनल हाईवे पर मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ने, अवैध कटों की भरमार और सुरक्षा इंतजामों की घोर अनदेखी से आम जनता की जान खतरे में पड़ गई है।
नेशनल हाईवे पर हाटा से लेकर बिहार सीमा तक जगह-जगह बिना तकनीकी स्वीकृति के अवैध कट बनाए गए हैं। इन कटों पर न तो चेतावनी बोर्ड हैं, न रिफ्लेक्टर और न ही स्पीड कंट्रोल के उपाय। नतीजतन आए दिन गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है और अनेक घायल हो चुके हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हाईवे से सटे कुछ ढाबों, पेट्रोल पंपों और निजी प्रतिष्ठानों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार कर कट दिलवाए गए। इसके पीछे कथित तौर पर “सुविधा शुल्क” का खेल बताया जा रहा है, जिसके चलते कार्यदायी संस्थाओं को मनमानी करने की खुली छूट मिल गई।
रात्रि में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। हाईवे पर स्ट्रीट लाइटें या तो खराब हैं या पूरी तरह बंद पड़ी हैं। कई स्थानों पर डिवाइडर टूटे हुए हैं, सर्विस रोड अधूरी है और गड्ढों ने सड़क को जानलेवा बना दिया है। इसके बावजूद न तो किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हो रही है और न ही सुधारात्मक कार्रवाई नजर आ रही है।
सबसे गंभीर सवाल परियोजना निदेशक की लंबी तैनाती को लेकर उठ रहा है। परियोजना निदेशक की तैनाती गोरखपुर परियोजना निदेशक कार्यालय में लगभग चार वर्षों से बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे रहने से भ्रष्टाचार को संरक्षण मिला और कार्यदायी संस्थाएं बेलगाम हो गईं।

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 अब इस पूरे मामले को लेकर आमजन, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों में रोष खुलकर सामने आ गया है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा संबंधित मंत्रालय और उच्चाधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। साथ ही अवैध कटों को तत्काल बंद कराने, दोषी अधिकारियों व कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा दुर्घटनाओं की न्यायिक जांच की भी मांग उठेगी।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह हाईवे विकास का प्रतीक नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और मौत का स्थायी गलियारा बन जाएगा।
परियोजना निदेशक कार्यालय गोरखपुर में चल रहे कथित भ्रष्टाचार की परतें अब तेजी से खुल रही हैं। जनहित से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को आगे भी तथ्यों के साथ पाठकों के सामने लाने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।

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