News Addaa WhatsApp Group Join करें

सुप्रसिद्ध थावे वाली माता मंदिर से जुड़ी है भक्त रहषु की यह कहानी

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Apr 6, 2022  |  3:44 PM

1,583 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
सुप्रसिद्ध थावे वाली माता मंदिर से जुड़ी है भक्त रहषु की यह कहानी

कुशीनगर के पड़ोसी बिहार प्रदेश के गोपालगंज जिले के थावे दुर्गा मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती है। गोपालगंज के सुप्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर दो तरफ से जंगलों से घिरा है और इस मंदिर का गर्भगृह काफी पुराना है। इस मंदिर में नेपाल, उत्तर प्रदेश, बिहार के कई जिले से श्रद्धालु पूजा-अर्चना एवं दर्शन करने आते हैं। वैसे यहां सालों भर भक्तों की कतार लगी रहती है, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र में पूजा करने का विशेष महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों में यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र में यहां खास मेला भी लगाया जाता है। इसके अलावा इस मंदिर में सोमवार और शुक्रवार को विशेष पूजा होती है।

आपके लिए और..- शोर पर चला कानून का डंडा : एसपी केशव कुमार...

सावन के महीने में भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर को लोग थावे वाली माता का मंदिर, सिंहासिनी भवानी के नाम से भी जानते हैं। यहां नवरात्र में पशुबलि देने की भी परम्परा है। लोग मां के दरबार में खाली हाथ आते हैं लेकिन मां के आशीवार्द से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। थावे दुर्गा मंदिर को सिद्धपीठ माना जाता है। थावे दुर्गा मंदिर की स्थापना की कहानी काफी रोचक है। चेरो वंश के राजा मनन सिंह खुद को मां दुर्गा का बड़ा भक्त मानते थे, तभी अचानक उस राजा के राज्य में अकाल पड़ गया। उसी दौरान थावे में माता रानी का एक भक्त रहषु था। रहषु के द्वारा पटेर को बाघ से दौनी करने पर चावल निकलने लगा। यही वजह थी कि वहां के लोगों को खाने के लिए अनाज मिलने लगा। यह बात राजा तक पहुंची लेकिन राजा को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था। राजा रहषु के विरोध में हो गया और उसे ढोंगी कहने लगा और उसने रहषु से कहा कि मां को यहां बुलाओ। इस पर रहषु ने राजा से कहा कि यदि मां यहां आईं तो राज्य को बबार्द कर देंगी लेकिन राजा नहीं माना। रहषु भगत के आह्वान पर देवी मां कामाख्या से चलकर पटना और सारण के आमी होते हुए गोपालगंज के थावे पहुंची। राजा के सभी भवन गिर गए। इसके बाद राजा मर गया।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, हथुआ के राजा युवराज शाही बहादुर ने वर्ष 1714 में थावे दुर्गा मंदिर की स्थापना उस समय की, जब वे चंपारण के जमींदार काबुल मोहम्मद बड़हरिया से दसवीं बार लड़ाई हारने के बाद फौज सहित हथुआ वापस लौट रहे थे। इसी दौरान थावे जंगल मे एक विशाल वृक्ष के नीचे पड़ाव डाल कर आराम करने के समय उन्हें अचानक स्वप्न में मां दुर्गा दिखीं। स्वप्न में आये तथ्यों के अनुरूप राजा ने काबुल मोहम्मद बड़हरिया पर आक्रमण कर विजय हासिल की और कल्याण पुर, हुसेपुर, सेलारी, भेलारी, तुरकहा और भुरकाहा को अपने राज के अधीन कर लिया। विजय हासिल करने के बाद उस वृक्ष के चार कदम उत्तर दिशा में राजा ने खुदाई कराई, जहां दस फुट नीचे वन दुर्गा की प्रतिमा मिली और वहीं मंदिर की स्थापना की गई।

ताज़ा मौसम अपडेट
संबंधित खबरें
दर्दनाक सड़क हादसा: एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, 7 घायल 
दर्दनाक सड़क हादसा: एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, 7 घायल 

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा गडहिया के…

पवन सिंह बनेंगे MLC! बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा ने जारी की 4 उम्मीदवारों की सूची
पवन सिंह बनेंगे MLC! बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा ने जारी की 4 उम्मीदवारों की सूची

न्यूज़ अड्डा: बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने…

“30 से 50 हजार का खेल!” – शराब तस्कर और चौकी इंचार्ज की कथित बातचीत का ऑडियो वायरल, खाकी पर उठे गंभीर सवाल
“30 से 50 हजार का खेल!” – शराब तस्कर और चौकी इंचार्ज की कथित बातचीत का ऑडियो वायरल, खाकी पर उठे गंभीर सवाल

कुशीनगर। खड्डा थाना क्षेत्र की शालिकपुर पुलिस चौकी एक बार फिर विवादों के केंद्र…

Advertisement
News Addaa Logo

© All Rights Reserved by News Addaa 2020

News Addaa Breaking