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UP: 4 साल में 10 रुपये बढ़ा गन्ने का मूल्य, इस बार बिना कीमत के दी जा रही पर्ची

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Dec 18, 2020  |  12:23 PM

712 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
UP: 4 साल में 10 रुपये बढ़ा गन्ने का मूल्य, इस बार बिना कीमत के दी जा रही पर्ची

मोदी सरकार ने देश के गन्ना किसानों को चीनी मिलों की ओर से बकाये के भुगतान के लिए 3500 करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान कर दिया है. देश में सबसे बड़े गन्ना उत्पादन वाले उत्तर प्रदेश में पिछले तीन साल में गन्ने के मूल्यों में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिसके चलते चीनी मिल मालिकों ने गन्ना किसानों को इस बार बिना कीमत की पर्ची काटकर दी है. सूबे में योगी सरकार के आने के बाद गन्ने के मूल्य में सिर्फ 2017-18 के सीजन में 10 रुपये प्रति क्विटंल बढ़ाया गया था, जिसके बाद से दोबारा कीमत नहीं बढ़ाई गई है जबकि सूबे में गन्ना किसान किसी भी पार्टी की सत्ता बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं.

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ऑल इंडिया किसान संघर्ष कमेटी ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक किसान नेता सरदार बीएम सिंह कहते हैं कि गन्ना पेराई सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ महीना हो चुका है, लेकिन प्रदेश की योगी सरकार ने अभी तक गन्ने का मूल्य घोषित नहीं किया है. गन्ना किसानों को बिना किसी मूल्य की पर्चियां काटी गई हैं. सरकार ने गन्ने का रेट तय करने के बजाय चीनी मिल मालिकों को आर्थिक मदद करने के लिए कदम उठाया है. गन्ना किसान प्रदेश में लगातार गन्ना मूल्यों की बढोतरी की मांग उठा रहा है, लेकिन सरकार अभी तक कोई रेट तय नहीं कर रही है जबकि महंगाई दर लगातार बढ़ती जा रही है.

यूपी गन्ना उत्पादन में नंबर वन

बता दें कि देश का सर्वाधिक गन्ना उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है. देश के गन्ने के कुल रकबे का 51 फीसद और उत्पादन का 50 और चीनी उत्पादन का 38 फीसद उत्तर प्रदेश में होता है. भारत में कुल 520 चीनी मिलों से 119 उत्तर प्रदेश में हैं. देश के करीब 48 लाख गन्ना किसानों में से 46 लाख से अधिक किसान चीनी मिलों को अपने गन्ने की आपूर्ति करते हैं. यहां का चीनी उद्योग करीब 6.50 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार देता है.

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की बड़ी संख्या होने के नाते यह राजनीतिक रूप से यह बेहद संवेदनशील फसल है. वर्ष 2017 में यूपी में बीजेपी सरकार बनने के बाद गन्ने के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई थी. इसमें सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 315 रुपये और अग्रिम प्रजाति का मूल्य 325 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था. इसके बाद से गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ा है. वहीं, किसान संगठन गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले दिनों पश्चिम यूपी के कई जिलों में धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं.

गन्ना मूल्य को लेकर बैठक हो चुकी

बता दें गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) घोषित करने के लिए गन्ना आयुक्त और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है. इन बैठकों में चीनी मिल और किसान प्रतिनिधि अपना पक्ष रख चुके हैं. मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पिछले महीने 27 नवंबर को हुई राज्य परामर्शी मूल्य निर्धारण समिति की बैठक में किसानों ने 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य घोषित करने की मांग रखी थी. इस दौरान मुख्य सचिव ने विभिन्न जिलों के एनआइसी कार्यालय में बैठे किसान प्रतिनिधियों से वार्ता की थी, जिसमें किसानों ने कहा था कि गन्ना उत्पादन लागत 352 रुपये प्रति क्विंटल आ रही है, इसलिए गन्ना मूल्य 400 रुपये क्विंटल किया जाए.

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत बताते हैं उत्तर प्रदेश में पिछले तीन साल से गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ा है. किसान की लागत लगातार बढ़ रही है. कोरोना काल में किसानों ने ही देश की जीडीपी को बचाकर रखा है, लेकिन सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने में लगी है. पिछले साल का गन्ना भुगतान भी तक नहीं हुआ है. इससे किसान परेशान है. किसानों को इस बार बिना रेट की पर्चियां दी गई हैं और सरकार ने अभी तक मूल्य घोषित नहीं किया है जबकि पिछले महीने सरकार किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर गन्ना मूल्य को लेकर उनसे बातचीत भी कर चुकी है.

गन्ने की वास्तविक कीमत 400 रुपया प्रति क्विंटल

वहीं, किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुषेंद्र सिंह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद साल 2017-18 में 10 रुपये प्रति क्विटंल बढ़ाए गए थे. उसके बाद से गन्ना पेराई का चौथा सीजन चल रहा है, लेकिन योगी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है. महंगाई दर के लिहाज से देखें तो मौजूदा समय में 380 रुपये क्विटंल गन्ना पड़ रहा है, लेकिन किसान से सरकार 325 रुपये में खरीद रही है. इस सीजन में अभी तक गन्ने के मूल्य तय नहीं होने से रेट भी सामने नहीं आ रहे हैं. सरकार गन्ने के मूल्यों में मंहगाई दर के हिसाब से देती है तो कम से कम रेट 400 रुपये क्विटंल होना चाहिए, तब कहीं जाकर गन्ना किसानों को राहत मिल सकेगी. मौजूदा समय में सरकार 380 रुपये से कम कीमत गन्ना का प्रति क्विटंल तय करती है तो 2017 की तुलना में किसानों को नुकसान होगा. ऐसे में किसान संगठन यही मांग कर रहे हैं कि यूपी में कम से कम 400 रुपये प्रति क्विटंल रेट तय किया जाए नहीं तो किसान सड़क पर उतरने को मजबूर होगा.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महज 15 महीने का समय बाकी है. ऐसे में किसान संगठनों ने प्रदेश सरकार पर गन्ने का दाम नहीं बढ़ाने पर आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया है. गन्ने की सियासत पर पकड़ बनाने के लिए ही यूपी में भाजपा की सरकार बनने पर गन्ना बेल्ट के सुरेश राणा गन्ना विकास विभाग के मंत्री बनाए गए थे. साल 2019 लोकसभा चुनाव में गन्ना किसानों का समर्थन पाने के लिए केंद्र सरकार ने भी राहत पैकेज का ऐलान किया था, जिसका सियासी फायदा भी मिला है. ऐसे में सरकार चुनाव से पहले किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी, लेकिन देखना है कि इस बार गन्ना मूल्यों में सरकार कितने रुपये की बढ़ोतरी करती है.

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