कुशीनगर। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त धर्म स्थली है जो उत्तर प्रदेश के उत्तरी-पूर्वी सीमान्त इलाके में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह एक बौद्ध तीर्थस्थल है जहाँ गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। वर्तमान में यह कुशीनगर जिले के अन्तर्गत आता है। “कसया बाजार” नाम कुशीनगर में बदल गया है और उसके बाद “कसया बाजार” आधिकारिक तौर पर “कुशीनगर” नाम के साथ नगरपालिका बन गया है। कुशीनगर का इतिहास काफी समृद्ध एवं गौरवशाली रहा है।
कुशीनगर, राष्ट्रीय राजमार्ग २८ पर गोरखपुर से लगभग ५० किमी पूरब में स्थित है। कुशीनगर से २० किमी पूरब की ओर जाने पर बिहार राज्य आरम्भ हो जाता है।
यहाँ कई देशोंं के अनेक सुन्दर बौद्ध मन्दिर हैं। इस कारण से यह एक अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भी है जहाँ विश्व भर के बौद्ध तीर्थयात्री भ्रमण के लिये आते हैं। यहाँ अन्तर्राष्ट्रीय एयर पोर्ट के होने से नेपाल और अन्य देशो से आवागमन बढ़ जायेगा नेशनल हाईवे 28 के सटे बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बुद्ध इण्टरमडिएट कालेज, प्रबुद्ध सोसाइटी,भिक्षु संघ, प्रबुद्ध एक्युप्रेशर सेन्टर, चन्दमणि निःशुल्क पाठशाला, महर्षि अरविन्द विद्या मंदिर है कुशीनगर के आस-पास का क्षेत्र मुख्यतः कृषि-प्रधान है। जन-सामन्य की बोली भोजपुरी है। यहाँ गेहूँ, धान, गन्ना आदि मुख्य फसलें पैदा होतीं हैं।
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर में एक माह का मेला लगता है। यद्यपि यह तीर्थ महात्मा बुद्ध से सम्बन्धित है, । इस मेले में आस-पास की जनता पूर्ण श्रद्धा से भाग लेती है और विभिन्न मन्दिरों में पूजा-अर्चना एवं दर्शन करती है। भगवान के अवतार के रुप मे बुद्ध को माना जाता है यहां हजारों पर्यटकों की संख्या प्रति दिन कोरोना काल के पूर्व दर्शन करने आते थे तिब्बत जापान लंका सरकार ने बुद्ध भगवान का मंदिर बनवाया है तथा विदेशी पर्यटक काफी संख्या में आते है लेकिन कोरोना काल से पर्यटन स्थल प्रभावित है।
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