News Addaa WhatsApp Group

हिंदी के महान साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की 112 वीं जयंती

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Mar 7, 2023  |  5:22 PM

1,138 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
हिंदी के महान साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की 112 वीं जयंती

कसया/कुशीनगर। बुद्ध की धरती कुशीनगर में जन्में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ भारत की उस वैचारिक चिंतन परम्परा के प्रतिनिधि साहित्यकार और विचारक हैं जो विचारधारा की कट्टरता के आग्रह से मुक्त रही है।

आज की हॉट खबर- ओटी हुई थी सील, संचालक ने अस्पताल खोल कर दिया...

उक्त विचार बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर में हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर गौरव कुमार तिवारी ने हिंदी के महान साहित्यकार अज्ञेय के 112 वें जन्मदिवस के अवसर कही। उनकी रचनाएँ व्यक्तित्व और वैचारिकी की मुक्ति का उद्घोष करती हैं। उन्होंने साहित्य और कला के निर्माण और आस्वादन की प्रक्रिया पर खूब लिखा है। स्वतंत्रता और सृजन उनकी रचनाओं के केंद्र में है। इन अर्थों में उनकी जयंती के अवसर पर उन्हें याद करना इसलिए जरूरी है क्योंकि वे पूर्वग्रह मुक्त चिंतन परम्परा के सोपान हैं जो भारतीयता की अवधारणा को आगे बढ़ाती है। अज्ञेय के साहित्य में बौद्ध दर्शन और धर्म परम्परा के जो चिह्न हैं वे कुशीनगर में जन्म होने के कारण उनकी पहली सांस के साथ उनके अंदर प्रवेश का परिणाम हैं, इस बात को उन्होंने अनेकशः कहा भी है। अज्ञेय जी का जन्म 7 मार्च 1911 को बुद्ध स्थली कुशीनगर में हुआ था। तब उनके पिता हीरानंद शास्त्री पुरातत्व विभाग की ओर से कुशीनगर के ऐतिहासिक पुरावशेषों का खनन कार्य संपादित करा रहे थे। उनका बचपन लखनऊ, कश्मीर, बिहार और मद्रास में बीता। वह हिन्दी में अपने समय के सबसे चर्चित कवि, कथाकार, निबन्धकार, पत्रकार, सम्पादक, यायावर, अध्यापक रहे हैं। अज्ञेय संवेदनशीलता इतनी गहरी है कि उनकी नजर उन भुला दिये गए उन लोगों पर भी जाती है जिन्होंने बड़ी बड़ी उपलब्धियों की भूमिका बनायी है लेकिन उनका कोई नाम तक नहीं लेता। उन्हें नकार या भुला दिया जाता है। वे कहते हैं- जो पुल बनाएँगे/वे अनिवार्यत:/पीछे रह जाएँगे। सेनाएँ हो जाएँगी पार/मारे जाएँगे रावण/जयी होंगे राम,/जो निर्माता रहे इतिहास में/ बन्दर कहलाएँगे। कवि कर्म को अज्ञेय बहुत ही महत्वपूर्ण मानते हैं।

उनका मानना है कि कविता का दायित्व इतना बड़ा है कि कविता का निर्माण करना आग में जलने के समान है वे कहते हैं- कवि का है भाग यही/ आग से आग तक/जलना गलना/गलाना मन्दिर जिसका भी हो/प्रतिमा बनाना-बैठाना नहीं-/प्रतिमा के प्राणों को सुलगाना। प्रो0 श्री तिवारी ने महान हिंदी साहित्यकार को नमन करते हुए कहा कि कुशीनगर में अज्ञेय के लिखे साहित्य, विचारों पर परिचर्चा, चिंतन, शोध को बढ़ावा देना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

संबंधित खबरें
नवरात्रि के चौथे दिन रोटरी क्लब कुशीनगर द्वारा फलाहार का आयोजन-
नवरात्रि के चौथे दिन रोटरी क्लब कुशीनगर द्वारा फलाहार का आयोजन-

कसया, कुशीनगर। नवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को कलश गेस्ट हाउस में रोटरी…

36 घंटे में पुलिस का बड़ा खुलासा: डिग्गी तोड़कर उड़ाए ₹1.02 लाख बरामद, शातिर गिरफ्तार
36 घंटे में पुलिस का बड़ा खुलासा: डिग्गी तोड़कर उड़ाए ₹1.02 लाख बरामद, शातिर गिरफ्तार

कुशीनगर। जनपद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 36 घंटे के भीतर मोटरसाइकिल…

हाईवे पर दौड़ती लग्जरी कार से ‘शराब का खजाना’ बरामद, तमकुहीराज पुलिस के हत्थे चढ़ा अंतरराज्यीय तस्कर
हाईवे पर दौड़ती लग्जरी कार से ‘शराब का खजाना’ बरामद, तमकुहीराज पुलिस के हत्थे चढ़ा अंतरराज्यीय तस्कर

कुशीनगर। जिले की तमकुहीराज पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लग्जरी कार से…

वार्षिकोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने मोहा मन
वार्षिकोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने मोहा मन

अहिरौली बाजार/कुशीनगर।अहिरौली बाजार क्षेत्र के बरवा बाबू में स्थित कैलाश शाही स्मारक इंटर कालेज…

News Addaa Logo

© All Rights Reserved by News Addaa 2020

News Addaa Breaking