कसया/कुशीनगर। जब मन में देश व समाज के प्रति सेवा भाव समा जाय तो वह इंसान अपने जीवन के अंतिम पड़ाव तक दुसरो की मदद और सेवा करना ही उसका दृढ़ संकल्प बन जाता है l किसी शायर ने सच ही कहा है। “मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती है, स्वप्न के पर्दे निगाहों से हटाती है, हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर क्योंकि ठोकरें इंसान को चलना सिखाती है”
सचमुच इंसान को जब ठोकर लगता है तो वह हर कदम बहुत ही सोच समझकर चलता है, समाज के अंदर कुछ अच्छे इंसान आज भी मौजूद हैं जो दूसरे का दर्द को देखकर अपना दर्द समझते हैं। मैं बात कर रहा हूं एक ऐसी साहसी सम्मानित किन्नर समाज से आने वाले रूबी किन्नर की कहानी ।।
रूबी किन्नर बचपन पर से ही अपने घर परिवार माता-पिता रिश्तेदारों को त्याग कर समाज के लोगों की सेवा निस्वार्थ भाव से करती रहती हैं। कुशीनगर जनपद के फाजिलनगर क्षेत्र के ग्राम पंचायत रहसू जनुबी पट्टी में अपने किन्नर समाज के साथ रहती है। इस क्षेत्र में इनका नाम बहुत ही सम्मान से लिया जाता है। क्योंकि इनके दरवाजे पर कोई भी दीन दुखी असहाय गरीब लोग पहुंचते हैं तो उनकी मदद निस्वार्थ भाव से करती रहती हैं। गरीब बेटियों की शादी से लेकर सरकारी विभाग में भी इनका योगदान काफी सराहनी रहा है। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि हमारा सारा जीवन समाज के लिए ही समर्पित है।
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