अहिरौली बाजार/कुशीनगर।कप्तानगंज विकास खण्ड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पकड़ी में शुभ वाटिका मैरेज हॉल में चल रहे सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक राधेश्याम शास्त्री ने द्रौपदी चीर हरण का वर्णन करते हुए कहा कि।
चीरहरण का तात्पर्य वस्त्र हरण नही है अग्यान हरण है। दुर्योधन के आदेश पर दुशासन ने द्रौपदी का चीर हरण किया।तब द्रौपदी ने भगवान श्री कृष्ण को स्मरण किया तब भगवान श्रीकृष्ण ने उसकी लाज बचाई।अंत में दुशासन हार गया।लेकिन द्रौपदी का वस्त्र हरण नहीं कर पाया।पांडवों की रक्षा के लिए कृष्ण युद्ध में सारथी बने और सदैव उनके साथ रहे।कथा से पूर्व मुख्य यजमान के रूप में आनन्द सिंह और सह यजमान के रूप में विजय प्रताप सिंह भुपेंद्र सिंह द्वारा व्यास एवं व्यासपीठ का पूजन सपत्नि किया गया।
इस दौरान समाजसेवी मनीष मध्देशिया,जिला पंचायत सदस्य रामचन्द्र पासवान सहित अन्य भक्तगण उपस्थित रहे।
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