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कप्तानगंज: तहसील आपके द्वार कार्यशाला का हुआ आयोजन

Farendra Pandey

Reported By:

Oct 16, 2023  |  6:44 PM

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कप्तानगंज: तहसील आपके द्वार कार्यशाला का हुआ आयोजन

कप्तानगंज/कुशीनगर। स्थानीय तहसील कप्तानगंज के सभागार में अपर जिलाधिकारी कुशीनगर के अध्यक्षता में तहसील आपके द्वार कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें उप जिलाधिकारी, तहसीलदार,नायब तहसीलदार, लेखपाल, सचिव, ग्राम प्रधान, कोटेदार आदि ने भाग लिया। जिसमें जनता को सस्ती सुलभ व त्वरित न्याय प्रदान करने वादों के निस्तारण में लगने वाले समय में बचत करना,आम जन मानस में जिला प्रशासन व न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास पैदा करना, कानूनी प्रक्रिया तथा भारतीय परम्परा के सामन्यस व सहमति के आधार पर न्याय प्रदान करना,भूमि विवादों में कमी लाना, फैसलों में पारदर्शिता लाकर भ्रष्टाचार को समाप्त करना, अर्थात सभी का उद्देश्य निःशुल्क घर बैठे त्वरित रूप से न्याय करना है। इन सभी विन्दुओं को ध्यान में रखते हुए सक्षम अधिकारी व कर्मचारियों को कार्य करने की जानकारी दी।

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सोमवार को तहसील सभागार में अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा की अध्यक्षता में तहसील आपके द्वार कार्यशाला का आयोजन में उप जिलाधिकारी ब्यास नारायण उमराव कप्तानगंज, तहसीलदार गोपाल कृष्ण त्रिपाठी,नायब तहसीलदार अंजू यादव, राजस्व निरीक्षक, शिव प्रसाद गुप्ता, रमेश, अरविंद, लेखपाल ओम प्रकाश पाण्डेय, मार्कण्डेय गुप्ता, आशुतोष कुशवाहा, उमेश शाही, दिलीप सिंह प्रधान व कोटेदार ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लोगों को आये दिन भूमि विवादों या राजस्व के मामले को लेकर तहसील का चक्कर न लगाना पड़े, इसलिए तहसील आपके द्वारा योजना के माध्यम से कम समय में सस्ते व सुलभ सुव्यवस्थित तरीके से सौहार्द व सामन्यस से न्याय प्रदान करना है तथा जनता में जिला प्रशासन व व्यवस्था के प्रति विश्वास पैदा करना है। जनता को वादों के निस्तारण में लगने वाले समय बचत व सुलभ तरीके से न्याय प्रदान करना। अर्थात इन सभी लक्ष्यों का उद्देश्य राजस्व व भूमि विवादों में कमी लाना है।

कार्यशाला के दौरान अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के राजस्व न्याय व्यवस्था पर चर्चा करते हुए बताया कि राजस्व न्याय व्यवस्था में दो प्रकार के निस्तारण के तरीके हैं ।

1-पारम्परिक न्याय व्यवस्था जिसमें ग्रामीण पंच एक साथ मिल बैठकर भूमि विवादों का पंचायत में फैसला कर देते उन पंचों के द्वारा निर्णय लिए गए निर्णय के अनुसार अपने अपने हिस्से पर स्थापित हो जाते थे। यह व्यवस्था सस्ती, सर्व शुलभ,आपसी सहमति, सौहार्दपूर्ण के साथ साथ त्वरित होती थी।
2-राजस्व न्यायालय व्यवस्था जिसमें औपचारिक बाद दायर कर गुण दोष के आधार पर निर्णय दिया जाता था। इस व्यवस्था में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत व विधिक व्यवस्था का अनुपालन किया जाता है।

इन दोनों उपरोक्त न्यायिक व्यवस्थाओं में कुछ कमियों के कारण राजस्व व भूमि के विवाद का निर्णय त्वरित नहीं मिल पाता जिससे आये दिन विवादों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिसके कारण मार पीट हत्या जैसी घटनाएं भी उत्पन्न हो रही है। जिस पर अंकुश लगाने हेतु व भुमि विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए तहसील आपके द्वार कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें उनके गांव में जाकर राजस्व कर्मी स्वत अवलोकन करते हुए निर्णय करेंगे। लोगों को तहसील का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।

इस दौरान लेखपाल मदन गोपाल, गोविंद, प्रदीप कुमार, ग्राम प्रधान सुरेश प्रसाद, संतोष सिंह, शिव वर्धन, सुभाष यादव गौतम सिंह सहित प्रधान व कोटेदार उपस्थित रहे।

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