मल्लूडीह/कसया। युगों-युगों तक हिंदू धर्म के एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक ग्रंथ के तौर पर रामायण ग्रन्थ पढ़ा जाएगा । रामायण लिखने का श्रेय एक ऐसे ऋषि को जाता है, जो कभी असमाजिक व्यक्ति हुआ करते थे । हालांकि बाद में नारद मुनि के साथ हुई मुलाकात के बाद उनका ह्रदय परिवर्तित हुआ और उन्होंने लूट पाट करना छोड़कर सत्कर्म का मार्ग अपनाया ।
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, अपने पापों की क्षमा मांगने के लिए रत्नाकर ने ब्रह्मा जी का कठोर तप किया। तप में लीन रत्नाकर के शरीर पर दीमक की मोटी परत चढ़ गई। ब्रह्मा जी ने उनके तप से प्रसन्न होकर उन्हें वाल्मीकि नाम दिया। कहा जाता है कि जब प्रभु श्रीराम ने माता सीता को त्याग दिया था, तब वह ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में रहने लगी थीं, जहां उन्होंने अपने दोनों पुत्र लव और कुश को जन्म दिया था। ऋषि वाल्मीकि ने ही महाकाव्य रामायण लिखी। ऋषि वाल्मीकि का जन्म आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को हुआ था । पूरा भारत देश इस दिन पूजा पाठ करके बकायदा श्रीराम चरित मानस का पाठ करता है ।
इसी क्रम में कसया तहसील प्रांगण में तहसीलदार कसया मानधन्ता प्रताप सिंह के अगुयायी में कानूनगो कसया मुरारी लाल श्रीवास्तव ने विधि पूर्वक पंडित नन्हे मिश्रा के द्वारा कराया गया । पूजा में उपस्थित लेखपाल संघ के मंत्री डॉ शैलेंद्र दुबे , लेखपाल अरविंद तिवारी , लेखपाल गौरव सिंह आदि लोग उपस्थित रहे । मंटू पाठक की टीम द्वारा श्री राम चरित मानस का पाठ और भजन कराया जा रहा जो 24 घंटे तक चलेगा ।
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