कसया/कुशीनगर। गीता में भगवान कृष्ण ने रणभूमि में अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा है कि हे अर्जुन ‘योगस्थ: कुरु कर्माणि’ अर्थात हे अर्जुन योग में स्थित होकर कार्य करो क्योंकि जब मनुष्य के जीवन में योग आ जाता है तो वह हर प्रकार से जो भी कार्य करेगा सकारात्मक व सफलता देने वाला होगा। भारत के एक बहुत ही प्रसिद्ध मनीषी ‘महर्षि महेश योगी’ ने यह बताया कि मानव कैसे दो सौ परसेंट लाइफ़ जी सकता है योग के द्वारा वह शक्ति है जो किसी मनुष्य को आंतरिक और वाह्य दोनों तरफ से परिष्कृत करता है महर्षि पतंजलि ने भी कहा है ‘योगसु कर्मसु कौशलम’अर्थात योग में स्थित होकर जब कार्य होते है तो वह अत्यधिक ऊर्जावान व जीवन पोषक होंगे।योग जीवन जीने की एक कला है जो जीवन को सुखी व संपन्नता प्रदान करने वाला है जो आध्यात्मिक और सांसारिक,दैनिक कार्यों को करते हुए मनुष्य को पूर्णता स्वस्थ और समृद्ध बनाता है क्योंकि इस समय सभी लोग किसी न किसी अवसाद से ग्रसित हैं और वह अवसाद तनाव का रूप लेते हैं और तनाव बीमारियों का उद्भव करती हैं जिससे मनुष्य के जीवन में हमेशा परेशानियां बनी रहती हैं और इसका एक सरल उपाय,इलाज मात्र योग व ध्यान है जो प्रत्येक मानव को सर्वसुलभ है।इसी तरह आप देख सकते हैं कि लोग शुगर, बीप,मानसिक रोग इत्यादि से ग्रसित हैं सब सुविधाएं होते हुए भी मनुष्य को कहीं शांति नहीं मिल पा रही है इस आधुनिक दौर में एक ऐसी विद्या जो हमारी पुरातन व्यवस्था के अंतर्गत मिली है उसको जानने की पहचानने की आवश्यकता है वह है योग,योग एक फिजिकल एक्सरसाइज नहीं है वरन हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा दिया गया एक ऐसा वरदान है जिसमें हम अपने शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ और समृद्ध बना सकते हैं जो हमारे ऋषि-मुनियों ने बहुत पहले दिया था लेकिन हम लोग आधुनिकता अपनाते हुए उन चीजों को मूलभूत चीजों को भूल भी गए हमारी पीढ़ियां भूलती गई आज माननीय प्रधानमंत्री जी और हमारे माननीय मुख्यमंत्री योगी जी माननीय द्वारा जो एक प्रयास किया गया है कि योग को प्रत्येक व्यक्ति जाने योग है क्या अभी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बडा भव्य कार्यक्रम माननीय प्रधानमंत्री जी वह मुख्यमंत्री जी के निर्देशन में हुआ जो पूर्णतया सफल रहा।यह प्रत्येक मानव की आवश्यकता है इसके बिना एक सुखी जीवन की कल्पना करना बेमानी होगी जैसे कहा गया है कि ‘जड़ में पानी दो और फलों का आनंद लो’ अर्थात जब जड़ में हम पानी देंगे तो पौधा हरा-भरा और फलदार होगा हमको उसकी टहनी में फलों में फूलों में अलग -अलग पानी नहीं देना है हमें केवल जड़ में पानी देना है एक कुशल माली क्या करता है कि पौधे के जड़ों में उर्वरक,पानी जो भी है देता है और पौधा एक बड़े वृक्ष एक समृद्ध वृक्ष का रूप ले लेता है इसी प्रकार यदि हम अपने जीवन में योग अपनाते हैं तो योग के द्वारा हम पूर्णता आंतरिक और बाह्य इस भौतिक दुनिया में रहते हुए आंतरिक रुप से शांत रहेंगे और बीमारियों से हमारी रक्षा होती रहेगी क्योंकि यह बहुत ही पुरातन वीधा है जो हमारे ऋषि-मुनियों ने हम लोगों के लिए हमारे पूर्वजों ने हम लोगों के लिए ईजाद किया जिसका पूरा विश्व में आज डंका बज रहा है।
अभी 21 जून को अंतरास्ट्रीय योग दिवस को बड़ी धूम धाम से पूरे भारत मे एक उत्सव के रूप में मनाया गया जिसमें कुशीनगर का भी एक योगदान रहा जिसमे लगभग 5000 से 7000 लोगो ने एक जगह एकत्रित होकर योग किया।इसमें बहुत बड़ा सहयोग जिले में कार्यरत योग प्रशिक्षको की रही जिन्होंने लगातार तहसील, ब्लॉक,कोतवाली,इंटर कॉलेजों में जाकर सुबह योग के विभिन्न आसनों को कराया व इसके द्वारा होने वाले लाभों को बताया।इसमें जिले के आयुष अधिकारी डॉ. रामभरोस गुप्ता जी का भी योगदान सराहनीय रहा ।जिनके निर्देशन में विभिन्न गवर्मेंट आयुर्वेदिक हॉस्पिटल पर तैनात योग प्रशिक्षको ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।इसमें से कुशीनगर गवर्मेंट हॉस्पिटल(HWC) से योग प्रशिक्षक-श्री आदित्य दुबे,HWC सेखवानिया से श्री संजय प्रसाद,तुर्कपट्टी HWC से श्री विवेकानंद गौड़,फाजिलनगर से श्री ध्रुवनारायण, सोहसा HWC से श्री असरफी वर्मा,हाटा,मथौलीHWC से संजीव आदि रहे।
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