कसया/कुशीनगर। मुख्य चिकित्साधिकारी कुशीनगर के प्रशासनिक आदेश जिसमें बिना पुलिस के मजरुबी चिट्ठी के किसी भी चोटिल का मेडिको लीगल नो किए जाने के संदर्भ में जारी पत्र के विरोध में आज दीवानी न्यायालय कसया के अधिवक्ताओं ने प्रस्ताव पारित कर सांकेतिक रूप से अपने को न्यायिक कार्यो से विरत रखा और एक पत्रक जनपद न्यायाधीश कुशीनगर, जिला अधिकारी कुशीनगर व मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुशीनगर को देकर इस प्रशासनिक आदेश को जनहित व न्याय हित में वापस लेने की बात कही।विदित हो कि मुख्य चिकित्साधिकारी कुशीनगर ने दिनांक 8 जून को जारी पत्र में सभी चिकित्सा अधिकारी व सीएससी केंद्रों के प्रभारियों को इस आशय का पत्र प्रेषित किया है कि पुलिस द्वारा बिना मजरूबी चिट्ठी के किसी भी चोटिल व्यक्ति का मेडिकोलीगल ना किया जाए ।उसके आने के बाद एक तरफ जहां जनता अपने मूल अधिकारों से वंचित हो जाएगी ,वही थाने व अस्पतालों में भ्रष्टाचार का बोलबाला भी हो जाएगा ।इसी के विरोध स्वरूप आज कुशीनगर सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन कसया के अध्यक्ष ओम प्रकाश पांडे के नेतृत्व में पूर्व अध्यक्ष रविंद्र मणि, राकेश तिवारी व पूर्व महामंत्री आनंद राय व मनोज पांडे के साथ एक पत्र क इस आशय का दिया गया कि इस आदेश को तत्काल जनहित व न्याय हित में वापस लिया जाए नहीं तो अधिवक्ता आंदोलन के लिए बाध्य होंगे ।
बताते चलें कि ऐसा ही एक आदेश वर्ष 2013 में तत्कालीन सीएमओ द्वारा प्रेषित किया गया था जिसके वि रोध मेंअधिवक्ता गण का प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन जिला जज व सी एम ओ से मिला ।जिसे तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया ।पुन,, 9 वर्ष बाद उसी आशय का एक पत्र जारी किया गया है जिसको लेकर के काफी असंतोष व्याप्त है।
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