कसया/कुशीनगर। भारत बचाओ संविधान बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक एवं विश्व शांति मिशन के अध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर आयोजित गोष्ठी में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज एक बार फिर इस देश को लोकनायक जयप्रकाश जैसे नायक की आवश्यकता आ पड़ी है क्योंकि सत्ता में बैठे लोग निरंकुश हो गए हैं और लोक नायक द्वारा निरंकुश सत्ता के विरुद्ध ही आवाज उठाई गई थी जिसमें देश के नौजवानों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था, वह एक ऐसे नायक थे जो संभवतः नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बाद सबसे ज्यादा युवाओं में लोकप्रिय हुए।
उनके नायकत्व को सारी दुनिया ने 5 जून 1974 को देखा जब विशाल जनसभा में जेपी ने संपूर्ण क्रांति के दो शब्दों का उच्चारण किया था और पटना के गांधी मैदान में लगभग 5 लाख लोगों की जनसभा में देश की गिरती हालत, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, महंगाई ,बेरोजगारी, अनुपयोगी शिक्षा पद्धति और प्रधानमंत्री द्वारा अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का सविस्तार उत्तर देते हुए जनता में उत्साह भर दिया था। आगे श्री श्रीवास्तव ने कहा कि चीन के प्रति मोदी के प्रेम को देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया उन्होंने कहा कि एक तरफ चीन हमारे ऊपर हावी होता जा रहा है और दूसरी तरफ सरकार में बैठे लोग सत्ता में आते ही 3000 करोड़ से सरदार पटेल की मूर्ति चीन में बनाते हैं और 2500 करोड़ से रामानंदाचार्य की मूर्ति चीन से बनवाते हैं और उसे आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं जबकि मूर्तिकार राम सुतार भारत से जाकर चीन में मूर्ति तैयार किए। यह काम भारत में भी हो सकता था और उससे यहां के लोगों को लाभ मिलता। इसी तरह से भारत ने विगत 7 अक्टूबर को यूनाइटेड नेशन ह्यूमन राइट कमीशन में चीन के खिलाफ वोटिंग से नदारद रह कर चीन का ही सहयोग किया। इस संबंध में सुब्रमण्यम स्वामी जो भाजपा के पूर्व सांसद भी हैं ने भी मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है उनका कहना है कि वैसे तो मोदी सरकार के काम में कोई दखल नहीं दे सकता लेकिन चीनी राष्ट्रपति उन्हें लगातार ब्लैकमेल कर रहे हैं, स्वामी के अनुसार भारत जिनपिंग से डर कर बैठा है चीन ने हमारे कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है लेकिन मोदी चीन का नाम लेने से भी डरते हैं। उनकी चुप्पी से जाहिर है कि वह चीन के ब्लैक मेलिंग के शिकार हो रहे हैं। यूनाइटेड नेशन ह्यूमन राइट कमीशन में उइगर मुसलमानों के मामले में हुई वोटिंग में भारत ने मतदान नहीं किया था। शिनजियांग में मानव अधिकार की स्थिति को लेकर चीन के खिलाफ प्रस्ताव पर मतदान के दौरान भारत व 10 अन्य देशों के मतदान न करने से चीन के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव खारिज हो गया मानवाधिकार समूह चीनी प्रांत में मानवाधिकार हनन की घटनाओं से चिंता जता रहे उनका आरोप है कि चीन ने 10 लाख से ज्यादा उइगरों को हिरासत में ले रखा है, यूनाइटेड नेशन ह्यूमन राइट कमीशन के 47 सदस्य देशों में से 17 प्रस्ताव के पक्ष में और 19 देशों ने प्रस्ताव के विरुद्ध मत दिया वहीं 11 देशों ने मतदान में भाग न लेकर चीन का सहयोग किया इनमें भारत भी शामिल था । यह समझ से परे है कि भारत को चीन पर इतनी झिझक क्यों है।
7 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय ने मानवाधिकार के उल्लंघन पर अपना रुख स्पष्ट किया है और एल ए सी पर स्थित के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कहते हैं कि स्थिति अभी सामान्य नहीं है और भारत सरकार चीनी घुसपैठ पर संसदीय बहस के लिए तैयार नहीं है और विदेश मंत्रालय सांसदों को ताइवान जाने के लिए भी राजनीतिक मंजूरी नहीं देगा। अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि इन सब से यह जाहिर होता है कि चीन के प्रति मोदी सरकार का रुख बहुत ही नरम है । देश में गरीबी बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का बोलबाला है तथा सरकार द्वारा एन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहने के लिए जनता में आपसी विद्वेष और नफरत फैलाने का कार्य किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में पुनः इस देश को लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे एक ओजस्वी नायक की आवश्यकता आ पड़ी है। गोष्ठी में अताउल्ला शाही, राजन कुमार श्रीवास्तव, अतुल कुमार श्रीवास्तव, इंजीनियर मनजीत कुमार, हाजी मकबूल अहमद, अब्दुल रब खान, रेखा पांडे, पीयूष श्रीवास्तव, मिस्बाहुर रहमान आदि लोग उपस्थित रहे ।
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