कुशीनगर। ‘चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए..इस दिल पे लगा के ठेस कहां तुम चले गए.’ जगजीत सिंह की गाई गजल की ये पंक्तियां यूं तो सभी की जुबान पर हैं लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश के लोग इन पंक्तियों को फिर से गुनगुनाने लगे हैं क्योंकि चुनाव के दौरान ताल ठोंक रहे बड़े राजनीतिक सूरमाओं का न तो कोई संदेश ही मिल रहा है और न ही यह पता चल पा रहा है कि वे किसके साथ अपनी हार का गम बांट रहे हैं.
सबसे पहले बात करते हैं चुनाव से ठीक पहले भाजपा को अलविदा कहने वाले नेताओं ने दुविधा में दोनों गए न माया मिली न राम वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने चुनाव ठीक पहले भाजपा छोड़कर सपा का दामन थामा था। इनको लेकर कहा जा रहा था कि वह हवा का रुख भापकर सपा में गए हैं। हालांकि जब चुनाव परिणाम सामने आया है तो न घर के रहे न घाट के वाली बात सच साबित हुई है। कैबिनेट में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद वह पहले नेता थे जिनके जाने से बड़ी उथल पुथल मची थी। उन्होंने पिछड़ों के उत्पीड़न और विकास नहीं करने का आरोप लगाया था। इसी के साथ कहा था कि भाजपा के ताबूत में आखिरी कील ठोकी है। लेकिन जब चुनाव परिणाम सामने आए तो स्वामी को बड़ा झटका लगा। फाजिलनगर सीट से उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के सुरेंद्र कुशवाहा ने उन्हें 45 हजार से अधिक वोटों के अंतर से चुनाव में हराया।
बात अब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे अजय कुमार लल्लू ने दावे तो बड़े किए थे लेकिन नतीजा सिफर रहा. अब लल्लू इस गम में डूबे हुए हैं कि इस बार उनकी विधायकी गयी ही साथ ही साथ उनका कांग्रेस उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पद भी अब कांग्रेस हाई कमान ने छीन लिया है. अजय लल्लू ने इस बार ताबड़तोड़ जनसभाएं की थीं. लल्लू शायद इसलिए भी उत्साहित थे कि उन्हें इस बात का अहसास था कि पार्टी कमाल कर गई तो उत्तर प्रदेश में पार्टी की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अब मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे ज्यादा दूर नहीं है. उन्होंने एक चुनावी जनसभा के दौरान प्रियंका गांधी को बाइक पर बैठाकर अपने विधानसभा में घुमाया था जो की बहोत ही चर्चा के विषय बना हुआ था लेकिन प्रियंका की मेहनत भी अजय लल्लू के पक्ष में माहौल नहीं बना पाई. 3 मार्च को हुए मतदान के बाद यहां कांग्रेस की हैट्रिक की चर्चा थी, लेकिन भाजपा गठबंधन प्रत्याशी ने इस कांग्रेस की जीत पर ब्रेक लगा दिया. लल्लू को भाजपा गठबंधन के डॉ. असीम कुमार से हार का सामना करना पड़ा. यहां से सपा के उदय नारायण गुप्ता को डॉ. असीम कुमार ने 42164 वोटों से हरा दिया. जबकि अजय लल्लू को तीसरे नंबर पे रहना पड़ा.
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, ‘अब दोनों नेताओ के सामने राजनीतिक अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है. इन दोनों नेताओं को नए सिरे से अपनी राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी. असली नेता वही होता है जो हार के बाद भी आम जनता के बीच जाने का साहस जुटाता है.’
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