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Rain in Kushinagar/कुशीनगर: रूठे मेघा! बारिश में देरी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, धान की खेती पर पड़ेगा असर

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Jul 13, 2022  |  10:56 AM

791 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
Rain in Kushinagar/कुशीनगर: रूठे मेघा! बारिश में देरी ने बढ़ाई किसानों की चिंता, धान की खेती पर पड़ेगा असर
  • फ़सल की रोपाई न हो पाने से चिंतित दिखाई दे रहे किसान
  • बारिश न होने के कारण नहीं हो पा रही धान की रोपाई

कुशीनगर । एक बार फिर से किसानों के लिए मुसीबतें कड़ी हो रही है. इस बार जिले में मानसून काफी ज्यादा रूठा नजर आ रहा है. 25 दिन से ज्यादा होने के बाद भी किसानों को अभी तक सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है. बारिश न होने की वजह से किसानों के खेत सूखे पड़ें हैं. क्योंकि बारिश न होने से धान की रोपाई और खरीफ फसल की बुआई प्रभावित हो रही है। जिसको लेकर किसान बहुत ही चिंतित हैं। किसानों का मानना है कि इस बार बारिश न होने से सबसे ज्यादा धान की फसल की बुआई प्रभावित हो रही है। क्योंकि बारिश न होने के कारण किसानों के खेत सूखे पड़े हुए हैं और धान की फसल एक ऐसी फसल है, जिसको सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। बहुत ही मेहनत के साथ खून और पसीना एक करके किसानों ने धान की बीज तैयार की है। जिसमे किसानों ने अधिक पैदावार होने वाले धान के बीज अधिक मात्रा में तैयार की है।

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क्योंकि अब तो कई अलग-अलग प्राजतियों के नये धान के बीज भी बाजार में आ गये हैं। लेकिन नई प्रजातियों के धान वाले बीज अभी भी बहुत कम किसान पसंद करते हैं। लेकिन बारिश की कमी के कारण किसान बीज तैयार करने के बाद भी धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं और जो धान रोपाई हो भी गई है वह भी नहर से दूर वाले खेतों की सूख रही है। इसलिए किसान बहुत ही चिंतित और परेशान नजर आ रहे हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि धान की खेती करते हैं और ये ऐरिया धान की खेती के नाम से प्रसिद्ध है। यहां का किसान खरीफ के समय धान की बोआई ज्यादातर करता है।

उनको उम्मीद जग रही थी कि इस बीज डालने के बाद जिस तरह से मानसून अपना संतुलन बना रहा है। उससे लग रहा है कि बीज डाले फर ही हाथ रह जायेगी। क्योंकि धान की बीज तैयार करने के लिए किसानों को कड़ी मेहनत के साथ पानी में रह कर ही जुताई/बुआई की तैयार करनी पड़ती है। जिसमें बहुत ही मेहनत का काम होता है, लेकिन अब बीज तैयार होने के बाद बारिश न होने से रोपाई ठीक से नहीं हो पा रही खेत सूखे पड़े हैं। किसानों का यह भी कहना है कि खास धान पर धान की परंपरागत अच्छी पैदावार होती है और यहां का देसी धान खाने में भी बहुत स्वादिष्ट और मीठा होता है। जिसको अपने अलावा आस पास के लोग भी खाने के लिए बड़े शौक से ले जाते हैं। लेकिन पिछले साल धान कटने के बाद बारिश ने बहुत से किसानों का धान खेतों खलिहानों में भीगा दिया और अब इस साल बारिश न होने से धान नहीं लग पा रहा है और किसान हर रोज बारिश का इंतजार करते हैं।

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