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बाइस वर्षो से अपनी रचनाओं से क्षेत्र को पहचान दिलाने का प्रयास कर रही नूरी !आप भी जानिये ये नूरी है कौन??

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Jun 2, 2020  |  5:03 AM

1,913 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
बाइस वर्षो से अपनी रचनाओं से क्षेत्र को पहचान दिलाने का प्रयास कर रही नूरी !आप भी जानिये ये नूरी है कौन??
  • 22 वर्षो से अपनी रचनाओं से क्षेत्र को पहचान दिलाने का प्रयास कर रही नूरी
  • रियासत अली की पत्नी नुरफ़ातिमा भटवलिया की है निवासी

न्यूज अड्डा/कुशीनगर डेस्क

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कुशीनगर। प्रतिभा किसी की मोहताज नही होती हैं, ऐसा ही तमकुही विकास खण्ड के भटवलिया न.२ में देखने को मिल रहा है। रियासत अली उर्फ गुड्डू की पत्नी व अख्तर हुसैन की बेटी नुरफातिमा खातून नूरी भटवलिया में 2004 में शिक्षामित्र के रूप चयनित हुई, जो बाद में अपने अथक परिश्रम से 2016 में शिक्षिका के रूप में चयनित होकर पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रही हैं। प्रतिभा की धनी नूरी एक कवयित्री भी हैं और अपनी काव्य रचनाओं से इस पिछड़े क्षेत्र को भी पहचान दिला रही हैं। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल की शिक्षा ग्रहण करते समय हमने लेखन की शुरुआत कर दी, इस बीच तमाम उतार चढ़ाव आये, लेकिन हमने कविताएं लिखना जारी रखी। मेरे इस कार्य मे पिता व पति दोनो ने काफी सहयोग दिया, लेकिन एक कसक हैं कि वह मुकाम अब तक नही मिल पाया, जो मिलना चाहिए। शायद ग्रामीण व पिछड़ा क्षेत्र में होना इसकी वजह हो सकती हैं, वैसे मेरे विभाग की ओर से एक बार मुझे सम्मानित किया गया हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ काव्य रचनाए, जो उनकी प्रतिभा का दर्शन करा सभी को अपने क्षेत्र के विकास व सम्मान दिलाने के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
जाति-पाति के नाम पर आग लगाते है
साफ-पाक दामन पर दाग लगाते है
पूरा जीवन बदहाली में ही गुज़र गए
सारी उपलब्धियां मरने के बाद लगाते हैं
उन्हें आदमी की जरा भी परख नहीं
कौवे के पंख पे पर सुर्खाब लगाते हैं
किसानो को अन्न ही उगाने दीजिए
पर वो तो उनकेे जीवन में कांटों का बाग़ लगाते हैं
जिन्दगी कभी हंस के कभी रोके गुजारे” नूरी”
अच्छे बुरे कर्म तो पिछे से आवाज लगाते हैं।
मेहनत ,लगन, रूपया के साथ दुआ भी चाहिए,
रोटी, कपड़ा, मकान के साथ हवा भी चाहिए,
पुराने संस्कारों को हम दिल में संजोए रहें
पुराने रीति रिवाजों के साथ कुछ नया भी चाहिए,
औरत मर्द से कंधा मिलाकर चले जरूर,
रहें मर्यादा में नजरों में हया भी चाहिए,
कोई भी खुद को मुकम्मल नहीं कह सकता,
बुजुर्गो का तजुर्बा ताकत के लिए जवां भी चाहिए,
बचाव-बचाव सुनकर सब उब रहे हैं” नूरी”
अब कोरोनावायरस का दवा भी चाहिए।
उस्तादों का जहां भी सम्मान होता है
वहां का आम आदमी भी महान होता है
सबके दिलो पर जो राज करता है
असल ज़िन्दगी में वही धनवान होता है
ज़ालिमो के जुल्मों को माफ़ करता चले
वो जग का सबसे बड़ा इंसान होता है
वो देश क्या तरक्की करेगा साथियों
जहां का मालिक कर्त्तव्यों से अंजान होता है
शिक्षा की ज्योती जलता रहे “नूरी”सदा
शिक्षा तो ज़मीं का दूसरा भगवान होता है।।

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