कसया/कुशीनगर । श्री राम महायज्ञ के नवें दिन रविवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष व्यास संघ एवं पतालपुरी पीठाधीश्वर पूज्य संत बालक दास महाराज ने श्रीराम कथा की अमृत वर्षा कराते हुए माँ सीता के हरण से लेकर बालि वध तक का वर्णन किया। कथा के दौरान चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे प्रभु राम द्वारा माँ सीता का श्रृंगार के समय इन्द्र पुत्र जयंत द्वारा कौवे के भेष में चोंच मारने के दृश्य का वर्णन करते हुए कहा कि जब राम जी का बाण जयंत को मारने के लिए पीछे पड़ा तो नारद मुनि ने माँ सीता के शरण में जाने को कहा क्योंकि नारद मुनि संत थे और संत का हृदय मख्खन जैसे कोमल होता है और वह सदैव सत्य का मार्ग दिखाता है। सती अनुसईया एवं माँ सीता मिलन के प्रसंग में कथा वाचक ने कहा कि विपत्ति आने पर धैर्य, धर्म, मित्र और स्त्री की परीक्षा होती है। शबरी प्रसंग में कहा कि भगवान भक्त के वशीभूत होते हैं और प्रेम के प्यारे होते हैं। प्रेम और भक्ति के वशीभूत उन्होंने भीलनी शबरी के जूठे बेर तक को ग्रहण किया।
कथा का प्रारम्भ यजमान आलोक श्रीवास्तव एवं शशि श्रीवास्तवा द्वारा यज्ञाचार्य रामजी पाण्डेय के निर्देशन में व्यास पीठ के पूजन से हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 हरिओम मिश्र द्वारा किया गया। यज्ञ मंडप परिक्रमा हेतु श्रद्धालुओं से भरा रहा।
इस अवसर पर महंत त्रिभुवन शरण दास, पुजारी देव नारायण शरण, बाल मुकुंद शरण दास, विष्णु शरण दास, इन्द्र मिश्र, सुरेश गुप्त, मणि प्रकाश यादव, राजेश राय, प्रज्ञा राय, अभिलाषा मिश्रा, मयंक मणि, गीता, राम भवन, कमल चौरसिया, विजय श्रीवास्तव, गिरिजेश श्रीवास्तव सहित अधिकांश संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।
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