कसया/कुशीनगर । कसया स्थित श्रीरामजानकी मंदिर (मठ) में बारहवें वर्ष दस दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के सातवें दिन शुक्रवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष व्यास संघ एवं पतालपुरी पीठाधीश्वर पूज्य संत बालक दास महाराज ने श्रीराम कथा की अमृत वर्षा कराते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम सहित सभी भाईयों का विवाह संपन्न हुआ और बारात जनकपुरी से अयोध्या नगरी आई। बरात के आने की सूचना मिलते ही नगर में हर्ष का माहौल छा गया और प्रतिदिन मंगल गीतों से अयोध्या नगरी गुलजार होने लगी। इसी बीच दशरथ जी ने राम जी के राज्याभिषेक की घोषणा की परंतु कैकेयी को दिए गए वचन के प्रभाव में राम जी को वन गमन करना पड़ा और समूची अयोध्या नगरी में शोक में डूब गई। कथा के माध्यम से बालक दास महाराज ने कहा कि सुख और दुःख जीवन रूपी रथ के दो पहिये हैं। जिस प्रकार रथ दोनों पहियों के बिना अधूरा है उसी प्रकार जीवन में भी सुख और दुःख दोनों का समावेश होता है। जरूरी यह है कि हम श्रीराम जी की भांति सुख और दुःख दोनों में समभाव रखें। प्रभु श्रीराम जी न तो राज्याभिषेक की खुशी में झूमे और न ही वन गमन पर शोक किया। अपितु समभाव के साथ दोनों को स्वीकार किया। कथा के दौरान सच्चिदानंद के संयोजन में वृंदावन से आये कलाकार नरेश शर्मा ने “क्यों घबराऊँ मैं, मेरा तो श्याम से नाता है” गीत पर दीप नृत्य किया।
कथा का प्रारम्भ यजमान लाल साहब दुबे द्वारा आचार्य रामजी पाण्डेय के निर्देशन में व्यास पीठ के पूजन से हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 हरिओम मिश्र द्वारा किया गया। यज्ञ मंडप परिक्रमा हेतु श्रद्धालुओं से भरा रहा।
इस अवसर पर महंत त्रिभुवन शरण दास, पुजारी देव नारायण शरण, बाल मुकुंद शरण दास, विष्णु शरण दास, इन्द्र मिश्र, सुरेश गुप्त, मणि प्रकाश यादव, रौनक पांडेय, ऋषिकेश मिश्र, अवधेश मिश्र, सूरज वर्मा, अल्पना शुक्ला, दीप्ति श्रीवास्तव, फूलझड़ी यादव, अभिषेक श्रीवास्तव, रजनीश श्रीवास्तव, सुजीत गुप्ता, पीयूष सिंह, विश्वनाथ दास गुप्ता, दिव्यांशु श्रीवास्तव, धनंजय, नवनीत, गोविंद, सहित हजारों की संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।
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