गोरखपुर। 31 दिसंबर 2025 को गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर मोटरसाइकिल लेकर आने और एक महिला को बैठाकर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरपीएफ द्वारा मु0अ0सं0 04/26 धारा 147, 159 रेलवे एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू की गई थी।
घटना के सफल अनावरण के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया, जिनका पर्यवेक्षण क्षेत्राधिकारी गोरखपुर विनोद कुमार सिंह द्वारा किया जा रहा था। कड़े निर्देशों के बीच 05 जनवरी 2026 को जीआरपी गोरखपुर टीम ने मामले का सफल खुलासा कर दिया।
जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो में दिख रहा वाहन चालक राकेश कुमार पुत्र लालजी निषाद, निवासी बोदरवार, थाना कप्तानगंज, जनपद कुशीनगर है। वहीं बाइक पर पीछे बैठी महिला पलक साहनी (उम्र लगभग 24 वर्ष) के रूप में पहचान हुई, जो बनारस में बीएएमएस की पढ़ाई कर रही है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दोनों पिता-पुत्री हैं।
पुलिस ने घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल स्प्लेंडर (संख्या UP57 AJ 3249) को कब्जे में लेकर सीज कर दिया है तथा वाहन चालक को नियमानुसार कार्रवाई हेतु आरपीएफ को सुपुर्द कर दिया गया है।
जांच की कार्यप्रणाली
घटना के अनावरण के लिए दो टीमों का गठन किया गया। एक टीम जीआरपी प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह के नेतृत्व में तथा दूसरी टीम अपराध निरीक्षक विमलेन्द्र कुमार के नेतृत्व में बनाई गई। प्लेटफॉर्म संख्या-06 से जांच शुरू करते हुए कुल 08 आरक्षियों ने चार टीमों में बंटकर कार्य किया।
करीब 322 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, लेकिन घना कोहरा और रात्रि का समय होने के कारण वाहन संख्या स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। कैमरों के माध्यम से अभियुक्त के रूट को ट्रेस करते हुए टीम पीएसी कैंप के आगे अकटहवा चौराहा तक पहुंची, जहां आगे कैमरे उपलब्ध नहीं थे।
इसके बाद रेलवे के कमर्शियल कार्यालय और साइबर सेल की मदद से ऐसे यात्रियों की सूची तैयार की गई, जिनके पीएनआर में 18 से 30 वर्ष की महिलाएं अकेले यात्रा कर रही थीं। लगभग 250 पीएनआर चिन्हित कर उन्हें फिल्टर किया गया। बनारस, देवरिया और भटनी की बोर्डिंग को जांच के दायरे में लिया गया, जिसमें बनारस को प्राथमिकता दी गई।
जांच के दौरान कुल 04 संदिग्ध पीएनआर सामने आए। इनमें से पीएनआर संख्या 8142599556 पलक साहनी के नाम पाई गई। संबंधित मोबाइल नंबर की लोकेशन को कैमरों के अंतिम रूट से मिलान किया गया, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हो गया। इस तरह करीब 350 कैमरों और 650 पीएनआर के विश्लेषण के बाद मामले का सफल अनावरण किया गया।
इस पूरे अभियान में जीआरपी गोरखपुर के प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह की भूमिका सराहनीय रही। उनके नेतृत्व, सतर्कता और तकनीकी सूझबूझ से वायरल वीडियो की सच्चाई सामने आई और अनावश्यक अफवाहों पर विराम लगा।
रेलवे पुलिस की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि रेलवे परिसर में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या सुरक्षा से खिलवाड़ को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
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