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“हफुआ चतुर्भुज में बीबीजी रामजी योजना का ‘राज’…! जांच या लीपापोती? आखिर किसे बचाने की कोशिश?”

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Jul 31, 2026  |  5:45 PM

521 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
“हफुआ चतुर्भुज में बीबीजी रामजी योजना का ‘राज’…! जांच या लीपापोती? आखिर किसे बचाने की कोशिश?”

कुशीनगर। “जहां जज खुद मांस बेचता हो, वहां बकरी मुकदमा नहीं जीत सकती…” आम बोलचाल में कही जाने वाली यह कहावत इन दिनों सेवरही विकास खंड की ग्राम पंचायत हफुआ चतुर्भुज में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीबीजी रामजी योजना के तहत कराए गए कार्यों में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच जिस तरह आगे बढ़ रही है, उसने पूरे मामले पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब एक सप्ताह पहले सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर योजना में कथित घोटाले की चर्चा तेज होने के बाद खंड विकास अधिकारी द्वारा जांच कराए जाने की बात कही गई थी। लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो जांच की कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने आई है और न ही किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई होती दिखाई दे रही है। यही कारण है कि अब गांव से लेकर पूरे क्षेत्र में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या जांच निष्पक्ष हो रही है या फिर पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है?
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस तेजी से मामले की जांच होनी चाहिए थी, वैसा होता नहीं दिख रहा। उल्टे, जांच की धीमी रफ्तार और खामोशी ने लोगों के मन में संदेह पैदा कर दिया है। लोगों के बीच यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं यह मामला भी “जांच के नाम पर टाय-टाय फिस” साबित न हो जाए।
हफुआ चतुर्भुज में बीबीजी रामजी योजना के तहत कराए गए कार्यों को लेकर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि अब क्षेत्र के लोग सीधे जिलाधिकारी कुशीनगर से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन इस मामले में विकास खंड स्तर की जांच पर निर्भर रहने के बजाय स्वतंत्र जांच टीम गठित कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए, ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके और यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ग्राम पंचायत में सरकारी धन के उपयोग में बड़े स्तर पर गोलमाल हुआ है? यदि नहीं, तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में देरी क्यों? और यदि अनियमितताएं हुई हैं, तो आखिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है। अब देखना यह होगा कि यह जांच वास्तव में सच्चाई उजागर करती है या फिर सवालों के बीच ही दफन होकर रह जाती है।

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