इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश गोहत्या रोकथाम अधिनियम की धारा 3, 5 व 8 के तहत आरोपी बनाए गए जावेद नाम के व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान गाय को लेकर बेहद अहम टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि गाय भारत की संस्कृति का अहम हिस्सा है, इसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि गाय के संरक्षण को हिंदुओं का मौलिक अधिकार में शामिल किया जाए। भारतीय शास्त्रों, पुराणों व धर्मग्रंथ में गाय के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कोर्ट ने कहा कि भारत में विभिन्न धर्मों के नेताओं और शासकों ने भी हमेशा गो संरक्षण की बात की है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 48 में भी कहा गया है कि गाय नस्ल को संरक्षित करेगा और दुधारू व भूखे जानवरों सहित गौ हत्या पर रोक लगाएगा। भारत के 29 राज्यों में से 24 में गौ हत्या पर प्रतिबंध है। अदालत ने जावेद को जमानत देने से इनकार कर दिया. इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर कुमार यादव ने कहा कि गाय को मौलिक अधिकार देने और राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिए सरकार को संसद में एक विधेयक लाना चाहिए.
संसद में विधेयक लाकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करें
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, ”गाय को नुकसान पहुंचाने वालों को दंडित करने के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए. गोरक्षा का कार्य केवल एक धार्मिक संप्रदाय का नहीं है, बल्कि गाय भारत की संस्कृति है और संस्कृति को बचाने का कार्य देश में रहने वाले हर नागरिक का है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो. देश की संसद में विधेयक लाकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए और सख्त कानून बनाकर गाय को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.”
जब गाय का कल्याण होगा, तभी देश का कल्याण होगा
हाई कोर्ट ने गोहत्या के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, ”जब गाय का कल्याण होगा, तभी देश का कल्याण होगा. भारत पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है जहां विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं, जो अलग-अलग पूजा कर सकते हैं. लेकिन देश के लिए उनकी सोच समान है. ऐसे में जब हर कोई भारत को एकजुट करने और उसकी आस्था का समर्थन करने के लिए एक कदम आगे बढ़ाता है, तो कुछ लोग जिनकी आस्था और विश्वास देश के हित में बिल्कुल भी नहीं है, वे देश में इस तरह की बात करके उसे कमजोर करते हैं.”
जावेद की जमानत याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट से खारिज
अदालत ने कहा, मामले की परिस्थितियों को देखते हुए प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध साबित होता है. अगर उसे जमानत दी जाती है तो इससे बड़े पैमाने पर समाज का सौहार्द बिगड़ सकता है. याचिकाकर्ता ने समाज के सौहार्द को भंग किया है और जमानत पर रिहा होने पर वह फिर से वही काम कर सकता है जिससे समाजिक सद्भाव बिगड़ेगा. यह जमानत आवेदन निराधार है और खारिज करने योग्य है. इसलिए अदालत इसे खारिज करती है.”
देश में गोशालाओं की दयनीय स्थिति देखकर दुख होता है
अदालत ने यूपी में गोशालाओं की स्थित पर टिप्पणी करते हुए कहा, ”यह देखकर बहुत दुख होता है कि जो लोग गोरक्षा की बात करते हैं, वे गो भक्षक बन जाते हैं.” हाई कोर्ट ने कहा, ”सरकार गोशालाओं का निर्माण करवाती है, लेकिन जिन लोगों को गायों की देखभाल करनी होती है वे अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाते. इसी तरह निजी गोशालाएं भी दिखावा बनकर रह गई हैं, जिसके नाम पर लोग चंदा लेते हैं. देश में अभी जो गोशालाएं काम कर रही है उनकी स्थिति दयनीय है.”
फोटो खिंचाकर गो संवर्धन करने वालों से सावधान रहें
कोर्ट ने फैसले में टिप्पणी की है कि कुछ लोग गाय के साथ एक दो फोटो खिंचाकर सोचते हैं कि गो संवर्धन का काम हो गया। उनका गाय की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं होता है। उनका एकमात्र उद्देश्य गाय की सुरक्षा के नाम पर पैसे कमाना होता है।
मांस खाना मौलिक अधिकार नहीं
कोर्ट ने कहा गो मांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है। जीभ के स्वाद के लिए जीवन का अधिकार नहीं छीना जा सकता। बूढ़ी बीमार गाय भी कृषि के लिए उपयोगी है। इसकी हत्या की इजाजत देना ठीक नहीं। यह भारतीय कृषि की रीढ़ है। कोर्ट ने कहा 29 में से 24 राज्यों में गोवध प्रतिबंधित है। एक गाय जीवन काल में 410 से 440 लोगों का भोजन जुटाती है और गोमांस से केवल 80 लोगों का पेट भरता है। महाराजा रणजीत सिंह ने गो हत्या पर मृत्यु दण्ड देने का आदेश दिया था। कई मुस्लिम व हिंदू राजाओं ने गोवध पर रोक लगाई। मल मूत्र असाध्य रोगों में लाभकारी है। गाय की महिमा का वेदों पुराणों में बखान किया गया है। रसखान ने कहा जन्म मिले तो नंद के गायों के बीच मिले। गाय की चर्बी को लेकर मंगल पाण्डेय ने क्रांति की। संविधान में भी गो संरक्षण पर बल दिया गया है। कोर्ट ने कहा गाय को मारने वाले को छोड़ा तो फिर अपराध करेगा। कोर्ट ने संभल के जावेद की जमानत अर्जी खारिज कर दी है
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