कसया/कुशीनगर। बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भंते सभागार में महाविद्यालय तथा शोधावरी के संयुक्त तत्वाधान में डा. लल्लन मिश्र की पुस्तक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के लोकार्पण व हिंदी पत्रकारिता और गणेश शंकर विद्यार्थी विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई।
मुख्य अतिथि प्रो. चित्तरंजन मिश्र ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन करते हुए जेल गए पत्रकारों की गाथा को गौरवमयी बताया। कहा कि पहले की पत्रकारिता समाज बनाने की होती थी अब सरकार बनाने की पत्रकारिता हो गई है। लल्लन जी ने अपनी विद्या साधना को जीवन साधना बना दिया। प्रो अरुणेश नीरन ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि लल्लन मिश्र ऋषि परंपरा के आधुनिक रूप है। विपत्ति में भी धैर्य न खोने वाले, विद्यार्थियों के प्रति वत्सल, साहित्यकारों के प्रति पूजा भाव रखने वाले श्री मिश्र जैसा दूसरा व्यक्तित्व नहीं हैं। संयोजक प्रो हूबनाथ पाण्डेय ने कहा कि यह किताब गणेश शंकर विद्यार्थी और डॉ लल्लन मिश्र के जीवन मूल्यों को बचाए रखने की एक कोशिश है। उन्होंने कहा पत्रकारिता को मारना गणेशशंकर विद्यार्थी को मारना है। स्वागत भाषण करते हुए प्राचार्य डॉ सिद्धार्थ पाण्डेय ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज के वातावरण को शुद्ध करते हैं और हमे अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है। प्रथम में संचालन करते हुए डॉ सुधाकर तिवारी ने महाविद्यालय के पुराने समय को याद करते हुए अनेक संस्मरण सुनाए। आभार ज्ञापन श्री विश्वम्भर मिश्र ने किया।
द्वितीय सत्र में श्री मिश्रा ने कहा कि स्वतंत्रता पूर्व के पत्रकारों और पत्रिकाओं को देश बनाना थे। वे पत्र आर्थिक रूप से कमजोर थे लेकिन उनमें आत्मबल था। इन पत्रकारों ने समाज को बनाने के लिए जेल यात्रा को गौरव का विषय बनाया। सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अरुणेश नीरन ने पत्रकारिता के चार प्रकारों की चर्चा करते हुए कहा कि पहली समर्पण की पत्रकारिता, दूसरी महत्वाकांक्षा की पत्रकारिता तीसरा खोजी पत्रकारिता और चौथी व्यापारिक (पेड) पत्रकारिता। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पूर्व पहले तरह की, स्वतन्त्रता के बीस वर्षों बाद तक दूसरे प्रकार की उसके बाद तीसरे और अब चौथे प्रकार की पत्रकारिता ज्यादा प्रभावी है। पहले भाषा सेवियों ने फिर स्वतंत्रता सेनानियों ने अखबार निकाले आज पूंजीपति अखबार निकालते हैं। मुंबई आए समाजवादी समीक्षक डॉ अवधेश राय ने हिंदी पत्रकारिता के विकास पर चर्चा करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता के 196वां वर्ष चल रहा है। इस समय गणेश शंकर विद्यार्थी को याद करना महत्वपूर्ण है। पत्रकारिता के आदर्शों को याद करना आज के समय की आवश्यकता है। दयाशंकर तिवारी ने गणेश शंकर विद्यार्थी के व्यक्तित्व के विविध पहलुओं की चर्चा की। सत्र का संचालन करते हुए आयोजन सचिव डॉ गौरव तिवारी ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी और डॉ लल्लन मिश्र किसी राजनैतिक खांचे के एजेंडे को तय करने के लायक न होते हुए भी यदि आज इतनी आत्मीयता से याद किये जा रहे हैं तो यह उनके महत्व को प्रदर्शित करते हुए खुद ही एक महत्वपूर्ण घटना बन जाती है।
डॉ शत्रुघ्न सिंह ने गणेश शंकर विद्यार्थी के व्यक्तित्व और कृतित्व के उन पहलुओं की चर्चा की जिन्होंने उनके व्यक्तित्व की पहचान बनाई। डॉ सिंह ने गांधी और क्रांतिकारियों दोनों के साथ उनके सम्बन्धों को बताते हुए उनके राष्ट्र समर्पित व्यक्तित्व की विशिष्टता बताई।
कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य डॉ अमृतांशु शुक्ल, डॉ रामभूषण मिश्र, डॉ उर्मिला यादव, डॉ इन्द्रासन प्रसाद, डॉ उमाशंकर त्रिपाठी, डॉ सीमा त्रिपाठी, डॉ राजेश कुमार, डॉ त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी, डॉ निगम मौर्य, डॉ रीना मालवीय, डॉ राकेश चतुर्वेदी, डॉ सौरभ द्विवेदी, डॉ पारस नाथ, डॉ रमेश चन्द्र विश्वकर्मा, डर अनूप पटेल, डॉ योगेंद्र सिंह, डॉ दुर्गेश मणि, डॉ नरोत्तम तिवारी, डॉ संजय गुप्त, डॉ अजय सिंह, डॉ अर्जुन सोनकर, डॉ निरंकार राम, डॉ पंकज, डॉ जितेंद्र यादव डॉ अरुण कुमार सहित अनेक आचार्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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