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गोरखपुर: नाथ संप्रदाय पर पुस्तक समीक्षा एवं विशेष व्याख्यान का आयोजन

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Aug 28, 2024  |  8:01 PM

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गोरखपुर: नाथ संप्रदाय पर पुस्तक समीक्षा एवं विशेष व्याख्यान का आयोजन
  • गोरखनाथ ने भारतीय ज्ञान परंपरा को आचरण आधारित और त्याग आधारित बनाया : प्रो० चितरंजन मिश्र

गोरखपुर (शाश्वत राम तिवारी) । दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति प्रो० पूनम टंडन के संरक्षण में दीक्षांत सप्ताह समारोह के अंतर्गत महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में भारतीय ज्ञान परम्परा में नाथ संप्रदाय विषय पर पुस्तक समीक्षा के आयोजन के अंतिम चरण में बुधवार को विशिष्ट व्याख्यान के कार्यक्रम में पुरस्कार वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो०चितरंजन मिश्र, पूर्व प्रति कुलपति,महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय,वर्धा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो०पूनम टंडन के द्वारा की गयी।कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्रो० चितरंजन मिश्र एवं कुलपति प्रो० पूनम टंडन के द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। शोधपीठ के उप- निदेशक डॉ० कुशल नाथ मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया तथा विषय प्रवर्तन किया। व्याख्यान के मुख्य वक्ता प्रो० चितरंजन मिश्र ने भारतीय ज्ञान परम्परा के वृहद समृद्ध स्वरूप पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा बेहद समृद्ध है। इसमें वैदिक परंपरा है,पौराणिक परम्परा है,इसमें वह भी परम्परा है जो इन परंपराओं को खारिज करता है। यह अपनी विविधता को सँजोने वाली अद्भुत परंपरा है। बुद्ध के पहले ऐसा कोई नहीं था। जिसे ज्ञानी कहा जाए। बुद्ध का ज्ञान पहला ज्ञान है जो बाहर गया। उन्होंने मक्खलि गोसाल के आजीवक दर्शन एवं गोरखनाथ के दर्शन की तुलना करते हुए कहा कि गोरखनाथ का दर्शन मक्खलि गोसाल के दर्शन से मिलता जुलता है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बुद्ध के बाद एवं भक्ति आंदोलन के पूर्व गोरखनाथ सबसे तेजस्वी अध्यात्म नेता एवं पुरुष हुए है। गोरख ने अतार्किक औपनिषदिक ज्ञान को नाथ परम्परा में अस्वीकार किया। गोरखनाथ ने भारतीय ज्ञान परम्परा को आचरण मूलक एवं त्याग मूलक बनाया।

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23 अगस्त को पुस्तक समीक्षा लेखन का हुआ था आयोजन

पुस्तक समीक्षा लेखन आयोजन में गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं इससे सम्बद्ध महाविद्यालयों के अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिए विद्यार्थियों ने कुल 15 पुस्तकों की समीक्षा किया। पुस्तक समीक्षा के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार दिया गया। प्रथम स्थान दिव्य ज्योति मौर्य,द्वितीय स्थान निधि यादव,तृतीय स्थान नेहा तिवारी एवं सांत्वना पुरस्कार जावेरिया अहमदी को दिया गया। प्रतियोगिता में ही 7 अगस्त को आयोजित हुए उत्तर भारत के संत विषय पर स्केचिंग चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं के नाम की घोषणा एवं उनके पुरस्कार का वितरण भी किया गया। कनिष्ठ वर्ग में आर्यन भारती ने प्रथम स्थान,सदानन्द साहनी ने द्वितीय स्थान,कृष्ण वर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वरिष्ठ वर्ग में अनामिका कुमारी ने प्रथम स्थान,उमा भारती ने द्वितीय स्थान,हर्षित गुप्ता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। आभार ज्ञापन शोधपीठ के सहायक ग्रंथालयी डॉ० मनोज कुमार द्विवेदी के द्वारा किया गया। मंच का संचालन शोधपीठ के सहायक निदेशक डॉ० सोनल सिंह के द्वारा किया गया।

आयोजन में गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं शोध-छात्र, विद्यार्थी समेत,दीक्षांत समारोह समिति की संयोजक प्रो०नंदिता सिंह, अधिष्ठाता,छात्र कल्याण प्रो० अनुभूति दुबे,प्रो०विमलेश मिश्र प्रो० शरद मिश्र, प्रो०राजेश कुमार सिंह, प्रो० गौर हरि बोहरा, प्रो०करुणाकर राम त्रिपाठी,डॉ० मीतू सिंह, डॉ० सुनील कुमार, डॉ० गौरी शंकर चौहान, वरिष्ठ शोध अध्येता हर्षवर्धन सिंह, चिन्मयानंद मल्ल आदि उपस्थित रहे।

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