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एनएच-27 पर “रोड सेफ्टी” की आड़ में बड़ा खेल! (भ्रष्टाचार पार्ट तीन) मानकों की खुलेआम अनदेखी और करोड़ों के बंदरबांट के गंभीर आरोप

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Feb 26, 2026  |  4:39 PM

727 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
एनएच-27 पर “रोड सेफ्टी” की आड़ में बड़ा खेल! (भ्रष्टाचार पार्ट तीन) मानकों की खुलेआम अनदेखी और करोड़ों के बंदरबांट के गंभीर आरोप

कुशीनगर। जनपद कुशीनगर में कसया से लेकर बिहार सीमा तक राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर चल रहा सड़क सुदृढ़ीकरण कार्य अब सवालों के कठघरे में है। जिस कार्य का उद्देश्य दुर्घटनाओं को रोकना और आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वही कार्य यदि मानकों के विपरीत हो तो इसे विकास नहीं बल्कि आमजन के जीवन से खिलवाड़ कहना गलत नहीं होगा। स्थानीय लोगों, वाहन चालकों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि दुर्घटना बहुल क्षेत्रों में सड़क किनारे लगाए जा रहे रोड सेफ्टी वैरियर केवल कागजों में मजबूत हैं, जबकि हकीकत में वे बेहद कमजोर और असुरक्षित तरीके से लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह पूरा मामला कार्यदायी संस्था और परियोजना निर्देशक की कथित आपसी मिलीभगत का परिणाम है।

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बताते चलें कि एनएच-27 पर सड़क सुदृढ़ीकरण के दौरान प्राधिकरण के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि जहां दुर्घटनाओं की आशंका अधिक हो, वहां वाहनों की सुरक्षा के लिए मेटल बीम क्रैश बैरियर (MBCB) को स्थायी कंक्रीट नींव पर लगाया जाए। इसके लिए पहले खुदाई, फिर सीमेंट और कंक्रीट से मजबूत बेस तैयार किया जाना अनिवार्य है, ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बैरियर अपना काम सही ढंग से कर सके।
लेकिन आरोप है कि कार्यदायी संस्था गणेश बिल्डर्स द्वारा इन मानकों को दरकिनार करते हुए केवल प्रेशर मशीन से बैरियर को जमीन में ठोक दिया जा रहा है। न तो निर्धारित गहराई तक खुदाई की जा रही है और न ही सीमेंट-कंक्रीट का प्रयोग किया जा रहा है। इस तरह लगाए गए बैरियर तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर झेलने में पूरी तरह नाकाम साबित हो सकते हैं।

सुरक्षा के नाम पर असुरक्षा

स्थानीय जानकारों का कहना है कि ऐसे कमजोर बैरियर दुर्घटना के समय वाहन को रोकने के बजाय और अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि तेज गति से आ रहा वाहन ऐसे बैरियर से टकराता है, तो उसके उखड़ने या टूटने की पूरी आशंका बनी रहती है, जिससे चालक और यात्रियों की जान पर सीधा खतरा उत्पन्न हो सकता है।

पैसा बचाने का खेल, जान जोखिम में :

आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि मानक के अनुसार निर्माण न करके बड़ी मात्रा में सीमेंट, कंक्रीट और श्रम लागत बचाई जा रही है। इस बचत को कथित तौर पर आपसी धन-बंदरबांट में तब्दील किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे मामले में परियोजना निर्देशक की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जिनकी मौन स्वीकृति से यह सब हो रहा है।

जिम्मेदारी किसकी : ?

सवाल उठता है कि जब एनएच जैसी महत्वपूर्ण सड़क पर खुलेआम मानकों की अनदेखी हो रही है, तो संबंधित विभाग और अधिकारी चुप क्यों हैं? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है, ताकि उसके बाद जांच और कार्रवाई की औपचारिकता पूरी की जाए?

जनहित में जांच जरूरी :

आम लोगों की मांग है कि इस पूरे कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो तथा मानकों के अनुसार दोबारा रोड सेफ्टी वैरियर लगाए जाएं। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो एनएच-27 पर किया जा रहा यह कथित भ्रष्टाचार आने वाले समय में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

अब देखना यह है कि जिम्मेदार महकमा इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेता है या फिर “रोड सेफ्टी” के नाम पर यह खेल यूं ही जारी रहेगा।

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