तुर्कपट्टी। शुकदेव प्रसाद त्रिपाठी स्नातकोत्तर महाविद्यालय भठहीं खुर्द कुशीनगर में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के आठवें दिन प्रवचन करते हुए कथा व्यास त्रियुगीनारायण मणि त्रिपाठी ने कहा कि हनुमान जी कलयुग के प्रत्यक्ष देवता हैं, इनकी शरण में रहने से राम जी की कृपा मिलती है।
इनकी पूजा करने से हमारे सभी कार्य सफल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने तीन भक्तों को राजा बनाया प्रथम सुग्रीव को, तुम उपकार सग्रीवहि किन्हां ।राम मिलाय राजपद दीन्हा। द्वितीय विभीषण को राजा बनाया। विभीषण को कर्मवाद और भक्ति का उपदेश देकर राम के पक्ष में मिलाया,तब विभीषण ने सीता जी का पता बताया। हनुमान जी ने अशोक वाटिका का विनाश करके राक्षसों का वध करने लगे तब मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करके हनुमान जी को बांध कर रावण के दरबार में पेश किया।
वहां उनके पूंछ में रावण ने आग लगवा दिया तब हनुमान जी ने लंका को जला दिया। तत्पश्चात हनुमान जी ने सीता जी की सूचना राम जी को दिया।तब राम जी ने रावण का वध करके विभीषण को राजा बनाया। तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, राम मिलाय राजपद दीन्हा। जब अहिरावण ने राम लक्ष्मण को पाताल में ले गया तो हनुमान जी ने अहिरावण का वध करके राम लक्ष्मण को छुड़ाया,तब राम जी ने मकरध्वज को पाताल का राजा बनाया।पैठी पताल तोरी जमकार्य , अहिरावण की भुजा उखारे।
ऐसे श्री हनुमान जी अपने भक्तों के थोड़ी सी भक्ति पर ही प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे अनन्त, बलवन्त, संत श्री हनुमान लाल जी के शरण में रहने से राम की कृपा होती है।
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