हाटा/कुशीनगर। स्थानीय नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में स्थित जर्जर भवन में चल रहा है राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय,शासन व प्रशासन की उदासीनता के चलते जहा उपेक्षा का शिकार है वही आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस चिकित्सालय पर ध्यान नहीं दिया जिसके चलते जर्जर भवन में सुशोभित हो रहा है यह राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय।
स्थानीय नगर में स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय वर्षों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जर्जर भवन में चल रहा है।इस केंद्र पर आए दिन लगभग सौ मरीजों का ईलाज होता है परंतु सबका इलाज करने वाले इस होम्योपैथिक चिकित्सालय का भवन जर्जर स्थिति में, सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि कभी यह आवास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टरों का आवास के रुप में सुशोभित होता था बर्षो पहले डाक्टरों द्वारा यह आवास छोड दिया गया था जो अब राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के रुप में कार्यरत हैं।कभी कोई जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर आज तक ध्यान नहीं दिया। जिससे आज भी राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय जर्जर भवन में सुशोभित हो रहा है।इस केंद्र पर शासन द्वारा दवा तो उपलब्ध करा दिया जाता है परंतु दवा का बितरण किसमे किया जाएगा।आने वाले दिनों में टवलेट और सीरफ के रुप में दवा देने का योजना है जो कितना कारगर होगा वह वक्त बताएगा। इस चिकित्सालय में दवाओ का स्टोर भरा पड़ा है लेकिन ए वो दवाए है जिसके मरीज इस क्षेत्र में नहीं है।आखिर ए लाखो की दवाओ का क्या होगा अपने आप में यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
इस जर्जर भवन को यहा पर तैनात डाक्टरों द्वारा साफ सफाई कराकर किसी तरह से काम चला रहे हैं।बारिस के मौसम में एक भी पानी बाहर न जाकर अंदर ही गिरता है।जिस जर्जर भवन को डाक्टर पहले ही छोड चुके हैं वहीं जर्जर भवन में मरीजो का ईलाज हो रहा है अगर किसी दिन जर्जर भवन गिर जाए और जान माल का खतरा हो जाए तो उसका जिम्मेदार कौन होगा और जिम्मेदारी कौन लेगा।
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