रामकोला/कुशीनगर (न्यूज अड्डा)। अपने पुत्र के चिरंजीवी होने की कामना को लेकर बुधवार को महिलाओं ने जिउतिया को निर्जला व्रत रखा। व्रती माताओं ने निर्जला उपवास रखकर भगवान जीमूत वाहन की विधिवत पूजा-अर्चना एवं जीवित पुत्रिका व्रत कथा का नियमानुसार श्रवण किया। ऐसी मान्यता है कि व्रत रखने वाली माताओं के पुत्र दीर्घजीवी होते हैं और उनके जीवन में आने वाली सारी विपतियां स्वत: टल जाती है। पुत्रवती माताएं इस व्रत को पूरे मनोयोग से करती हैं। ऐसी मान्यता है कि जीउतिया व्रत रखने वाली माताओं के पुत्र न केवल दीर्घायु होते हैं बल्कि उन्हें हर तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है।
इस त्यौहार के बारे में आगे बताते हुए आचार्य विश्वनाथ पाण्डेय ने कहा की सतयुग के राजा जीयूतवाहन द्वारा अपनी प्रजा के बच्चों को गरुड़ से बचाने के लिए किए गए प्रयास से खुश होकर उन्हें गरुड़ ने यह वरदान दिया था कि ,आज के दिन से जो भी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को कुश की आकृति बनाकर पूजा करेगा उसके बच्चों पर आने वाले सारे संकट टल जाएंगे। तब से ही इस पर्व को हमारे पूर्वज मनाते आ रहे है।
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